“मरती मछलियां, उठती दुर्गंध: आनासागर झील की बदहाली के लिए कौन जिम्मेदार?”
न्यूज़ रिपोर्ट: हरि प्रसाद शर्मा
Edited By: नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
मई 17, 2025
अजमेर की ऐतिहासिक आनासागर झील इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है। कभी पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रही यह कृत्रिम झील आज बदहाली की मिसाल बन चुकी है। झील में मछलियों की लगातार हो रही मौत और उससे उठती दुर्गंध ने आसपास के क्षेत्रवासियों की परेशानी बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, झील में प्रदूषित पानी के घुलने, ऑक्सीजन की कमी, बढ़ते तापमान और कचरे की लगातार हो रही मिलावट ने इसकी पारिस्थितिकी को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। सीवरेज और नालों से सीधे झील में गिरता गंदा पानी स्थिति को और बिगाड़ रहा है।
स्थानीय लोगों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से झील की नियमित सफाई और संरक्षण की ठोस व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द उपाय नहीं किए गए, तो झील पूरी तरह मृतप्राय हो जाएगी। उन्होंने स्थायी समाधान के रूप में गंदे पानी की निकासी रोकने और ऑक्सीजन स्तर सुधारने वाली योजनाएं लागू करने की भी मांग की है।
गौरतलब है कि आनासागर झील का निर्माण 12वीं सदी में राजा अणाजी चौहान ने वर्षा जल संचयन के उद्देश्य से करवाया था। मुगल काल में इसके किनारे पर बारादरी और बाग़ भी बनाए गए थे। आज यह झील न सिर्फ अजमेर की पहचान है, बल्कि उसकी सांस भी—जो अब खतरे में है।

