मनुष्य जीवन अनमोल, प्रभु भी इसे पाने को तरसते हैं: स्वामी आत्मनिष्ठानंद
पुष्कर/अजमेर (हरिप्रसाद शर्मा): तीर्थराज पुष्कर में श्री मां सारदा देवी मंदिर की स्थापना की चतुर्थ वर्षगांठ का तीन दिवसीय महोत्सव रविवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। रामकृष्ण मिशन विवेकानंद स्मृति मंदिर, खेतड़ी के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम के अंतिम दिन भक्तों ने प्रभात फेरी निकाली और विशेष हवन-पूजन में आहुतियां दीं।

प्रभात फेरी से गुंजायमान हुआ पुष्कर
रविवार तड़के महोत्सव के तीसरे दिन की शुरुआत भव्य प्रभात फेरी के साथ हुई। भारत सेवाश्रम संघ, वामदेव मार्ग से शुरू हुई यह यात्रा सावित्री देवी पहाड़ के प्रवेश द्वार तक पहुंची। हाथों में मंगल कलश और संकीर्तन करते भक्तों के समूह ने पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया।
मां सारदा की विशेष पूजा और हवन
सावित्री देवी पहाड़ पर स्थित मां सारदा के मंदिर में प्रातः 8:30 बजे से विशेष अनुष्ठान प्रारंभ हुए। रामकृष्ण मिशन खेतड़ी के सचिव स्वामी आत्मनिष्ठानंद महाराज के सान्निध्य में विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इस पावन अवसर पर देश के विभिन्न कोनों से आए लगभग 150 रामकृष्ण-विवेकानंद भावधारा के अनुयायियों और संतों-महात्माओं ने भाग लिया।
स्वामी आत्मनिष्ठानंद का संदेश: सत्य और कर्म का मार्ग
हवन के उपरांत उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए स्वामी आत्मनिष्ठानंद महाराज ने आध्यात्मिक जीवन की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
- पूजा और हवन की आवश्यकता: आज के भागदौड़ भरे युग में मानसिक शांति और आत्मिक उन्नति के लिए प्रत्येक व्यक्ति को हवन और पूजा-अर्चना को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। इसी में मनुष्य जीवन की सार्थकता है।
- अनमोल मानव देह: संसार में मनुष्य योनि से श्रेष्ठ कुछ भी नहीं है। यह जीवन इतना अनमोल है कि स्वयं देवता और प्रभु भी मानव शरीर पाने के लिए लालायित रहते हैं।
- सत्य और श्रेष्ठ कर्म: उन्होंने भक्तों को सीख दी कि सदैव सत्य के मार्ग पर चलें और अपने कर्मों को शुद्ध रखें, क्योंकि अच्छे कर्म ही जीवन का असली आधार हैं।
बढ़ती आस्था का केंद्र: मां सारदा मंदिर
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 में रामकृष्ण मिशन खेतड़ी द्वारा पुष्कर में मां सारदा देवी के इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। तब से ही अंतरराष्ट्रीय तीर्थ पुष्कर में रामकृष्ण-विवेकानंद भावधारा से जुड़े श्रद्धालुओं की संख्या और आस्था में निरंतर वृद्धि हुई है।
समारोह के समापन पर सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। तीन दिनों तक चले इस महोत्सव ने पुष्कर के आध्यात्मिक वातावरण को एक नई ऊर्जा प्रदान की।
