मनसा देवी मंदिर हादसे में मारे गए श्रद्धालुओं को साधु-संतों ने दी श्रद्धांजलि, कहा – तीर्थ स्थलों पर धैर्य और संयम बनाए रखें

मनसा देवी मंदिर हादसे में मारे गए श्रद्धालुओं को साधु-संतों ने दी श्रद्धांजलि, कहा – तीर्थ स्थलों पर धैर्य और संयम बनाए रखें

गाज़ियाबाद/हरिद्वार। रिपोर्ट हरि प्रसाद शर्मा पुष्कर।संपादन नरेश गुनानी। टेलीग्राफ टाइम्स।
मनसा देवी मंदिर हादसे में मारे गए श्रद्धालुओं की आत्मा की शांति के लिए शनिवार को मंदिर प्रांगण और निरंजनी अखाड़े में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देशभर के हजारों साधु-संत और श्रद्धालु एकत्र हुए और दिवंगत आत्माओं को नमन किया।

हादसे की पृष्ठभूमि

हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में 27 जुलाई को भगदड़ मच गई थी। इस दर्दनाक हादसे में 9 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और 38 लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद से ही संत समाज ने इसे गंभीर चिंता का विषय मानते हुए श्रद्धालुओं से भविष्य में संयम और धैर्य बनाए रखने की अपील की थी।

संत समाज की उपस्थिति

श्रद्धांजलि सभा में शामिल प्रमुख संत:

  • श्रीमहंत हरि गिरि महाराज – जूना अखाड़ा, अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री
  • श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज – मनसा देवी मंदिर अध्यक्ष एवं अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष
  • श्रीमहंत मोहन भारती महाराज – जूना अखाड़ा सभापति
  • श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज – जूना अखाड़ा अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता, दूधेश्वरनाथ महादेव मठ पीठाधीश्वर एवं दिल्ली संत महामंडल अध्यक्ष

इसके अलावा जूना, निरंजनी, निर्मल, उदासीन समेत सभी अखाड़ों के संतों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

संतों के संदेश

  • श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा – “भगवान के दरबार में श्रद्धा और संयम जरूरी है। अफवाहों या जल्दबाजी में हादसे होते हैं। यदि श्रद्धालु कतारबद्ध होकर दर्शन करेंगे तो कभी भी भगदड़ जैसी स्थिति नहीं बनेगी।”
  • श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा – “27 जुलाई का हादसा अत्यंत दुखद था। भगवान से यही प्रार्थना है कि ऐसी कृपा बरसाएं कि फिर कभी ऐसा हादसा न हो।”
  • श्रीमहंत मोहन भारती महाराज ने कहा – “भीड़ अधिक होने पर श्रद्धालुओं को धैर्य और संयम का परिचय देना चाहिए। तभी हम अपने इष्ट के दर्शन सुरक्षित तरीके से कर पाएंगे।”
  • श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने बताया कि श्रद्धांजलि सभा का आयोजन सप्तमी तिथि पर किया गया क्योंकि यह माता रानी की तिथि मानी जाती है।

श्रद्धांजलि और भंडारा

श्रद्धांजलि सभा में दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की गई। संतों ने कहा कि देशभर का संत समाज मनसा देवी हादसे और उत्तराखंड की प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों के परिजनों के साथ खड़ा है।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन भी किया गया।

शामिल हुए प्रमुख संत-महात्मा

सभा में उदासीन अखाड़े के महामंडलेश्वर हरि चेतनानंद महाराज, स्वामी वीरेंद्रानंद गिरि, जसविंदर सिंह (निर्मल अखाड़ा), श्रीमहंत महेश पुरी, श्रीमहंत शैलेंद्र गिरि, श्रीमहंत ओम भारती, श्रीमहंत महाकाल गिरि, श्रीमहंत मनोज गिरि, श्रीमहंत पशुपति गिरि, श्रीमहंत देवानंद गिरि, महंत बृहस्पति गिरि, थानापति झोला गिरि, तूफान गिरि, श्रीमहंत शतानंद सरस्वती महाराज सहित देशभर से आए संतों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

 

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