| रिपोर्ट हरि प्रसाद शर्मा पुष्कर
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलकर ‘विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-GRAM G किए जाने पर गहरा रोष व्यक्त किया है। जूली ने आरोप लगाया कि यह केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली मनरेगा योजना को धीरे-धीरे समाप्त करने की एक सोची-समझी रणनीति है।
राज्यों पर वित्तीय बोझ और भेदभाव की आशंका
टीकाराम जूली ने योजना के वित्तीय ढांचे में किए गए बदलावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि:
- बढ़ी हिस्सेदारी: पहले मनरेगा में राज्यों का हिस्सा मात्र 10% होता था, जिसे अब बढ़ाकर 40% कर दिया गया है।
- आर्थिक संकट: कमजोर वित्तीय स्थिति वाले राज्यों के लिए यह अतिरिक्त 30% बोझ उठाना असंभव होगा।
- राजनीतिक भेदभाव: उन्होंने आशंका जताई कि केंद्र सरकार गैर-भाजपा शासित राज्यों को सहयोग देने में आनाकानी करेगी, जिससे इन राज्यों में योजना दम तोड़ देगी।
”दिल्ली से तय नहीं हो सकती गांवों की जरूरत”
जूली ने मनरेगा के ‘डिमांड बेस्ड’ (मांग आधारित) स्वरूप को खत्म करने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पहले ग्रामीण अपनी जरूरत के अनुसार काम मांगते थे, लेकिन अब काम का आवंटन दिल्ली से होगा।
”दिल्ली में बैठा व्यक्ति यह तय नहीं कर सकता कि सुदूर गांव की भौगोलिक और सामाजिक जरूरत क्या है। यह विकेंद्रीकरण की भावना के खिलाफ है।”
धार्मिक भावनाओं की आड़ में राजनीति का आरोप
योजना के नए नाम में ‘राम’ (G-RAM) शब्द के उपयोग पर जूली ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस को भगवान राम से कोई विरोध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं और योजना को बंद करने के इरादे को छिपाने के लिए धार्मिक भावनाओं का सहारा ले रही है।
अरावली और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर भी घेरा
प्रेस वार्ता के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने अन्य ज्वलंत मुद्दों पर भी अपनी बात रखी:
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मुद्दा |
टीकाराम जूली का रुख |
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अरावली संरक्षण |
अरावली केवल पहाड़ नहीं, राजस्थान की जीवनशैली है। इसे उद्योगपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए नष्ट नहीं होने देंगे। |
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भ्रष्टाचार |
मनरेगा में जीपीएस और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) जैसी पारदर्शी व्यवस्थाएं पहले से थीं। सरकार का भ्रष्टाचार का दावा निराधार है। |
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विधायकों पर आरोप |
तीन विधायकों पर लगे आरोपों को गंभीर बताते हुए उन्होंने निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
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