नरेश गुनानी
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क | अप्रैल 2026
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और अस्थिरता ने एक बार फिर दुनिया को उस “ऊर्जा जोखिम” की याद दिला दी है, जिसे वैश्विक अर्थव्यवस्था पिछले कई दशकों से अनदेखा कर रही थी। हालिया संघर्षों ने न केवल तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया है, बल्कि जीवाश्म ईंधनों (Fossil Fuels) पर दुनिया की अत्यधिक निर्भरता की पोल भी खोल दी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक ऊर्जा की दुखती रग
ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20% और तरल प्राकृतिक गैस (LNG) का एक बड़ा हिस्सा खतरे में है।
- आपूर्ति में व्यवधान: कतर और संयुक्त अरब अमीरात से होने वाला LNG निर्यात पूरी तरह इसी मार्ग पर निर्भर है। कोई भी स्थायी रुकावट एशिया और यूरोप में ऊर्जा की कीमतों को आसमान पर पहुँचा सकती है।
- कीमतों में उछाल: मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 39% तक की वृद्धि देखी गई है, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति (Inflation) का खतरा बढ़ गया है।
ऊर्जा की ‘कमज़ोरी’ उजागर
संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट किसी एक क्षेत्र की समस्या नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक ऊर्जा ढांचा कितना भंगुर है।
- परिवहन मार्ग की संवेदनशीलता: तेल और गैस की आपूर्ति कुछ विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों और जलमार्गों में केंद्रित है, जो सैन्य टकराव के प्रति बेहद संवेदनशील हैं।
- आर्थिक अस्थिरता: ऊर्जा की कीमतों में अस्थिरता का सीधा असर खाद्य सुरक्षा, परिवहन और विनिर्माण क्षेत्र पर पड़ता है, जिससे विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाएं सबसे अधिक प्रभावित होती हैं।
स्वच्छ ऊर्जा की ओर ‘महाप्रस्थान’ ही एकमात्र समाधान
इस संकट के बीच IRENA (International Renewable Energy Agency) की 2026 की रिपोर्ट एक सकारात्मक संकेत देती है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) की क्षमता में 692 GW की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है।
विशेषज्ञों का तर्क है कि:
- विकेंद्रीकरण (Decentralization): सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोत स्थानीय स्तर पर पैदा किए जा सकते हैं, जिससे किसी दूसरे देश या संकीर्ण जलमार्ग पर निर्भरता खत्म होती है।
- लागत में स्थिरता: जीवाश्म ईंधनों के विपरीत, एक बार स्थापित होने के बाद स्वच्छ ऊर्जा की लागत में भू-राजनीतिक तनाव के कारण उतार-चढ़ाव नहीं आता।
वैश्विक प्रतिक्रिया और भविष्य की राह
कई देशों ने इस आपात स्थिति से निपटने के लिए मांग-पक्ष के उपायों (Demand-side measures) को लागू करना शुरू कर दिया है। इसमें सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना, ‘वर्क फ्रॉम होम’ को प्रोत्साहित करना और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के लिए आयात कर में कटौती करना शामिल है।
