मधुमक्खी पालन से किसानों की आय होगी दोगुनी, राजस्थान बनेगा शहद उत्पादन का हब — कृषि मंत्री किरोड़ी लाल
जयपुर | 24 जनवरी 2026
| नरेश भाई
राजस्थान के कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री किरोड़ी लाल ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश के किसानों और पशुपालकों के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ नवीन तकनीकों और मधुमक्खी पालन जैसे सहायक व्यवसायों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।

शनिवार को जयपुर के दुर्गापुरा स्थित कृषि प्रबंध संस्थान (SIAM) में “हाई वैल्यू मधुमक्खी उत्पादन: तकनीकी, वर्तमान परिदृश्य, भविष्य एवं संभावनाएं” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय सेमिनार के समापन समारोह में किरोड़ी लाल मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
शहद उत्पादन में राजस्थान की बढ़ती धमक
कृषि मंत्री ने आंकड़ों के जरिए राजस्थान की शहद उत्पादन क्षमता को रेखांकित किया:
- राष्ट्रीय हिस्सेदारी: देश के कुल शहद उत्पादन में राजस्थान 9 प्रतिशत योगदान दे रहा है।
- अग्रणी राज्य: राजस्थान देश के शीर्ष 5 शहद उत्पादक राज्यों में शामिल हो चुका है।
- वर्तमान स्थिति: प्रदेश के 3,350 मधुमक्खी पालकों के पास लगभग 2.76 लाख मधुमक्खी कॉलोनियां हैं, जिनसे सालाना 8,500 मीट्रिक टन शहद प्राप्त हो रहा है।
- प्रमुख जिले: अलवर, भरतपुर और हनुमानगढ़ शहद उत्पादन में प्रदेश के अग्रणी जिले बनकर उभरे हैं।
मधुमक्खी पालन के लाभ और सरकारी प्रोत्साहन
किरोड़ी लाल ने बताया कि मधुमक्खी पालन न केवल शहद देता है, बल्कि फसलों के परागण (Pollination) में मदद कर उत्पादन को 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ा देता है। सरकार इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित कदम उठा रही है:
- अनुदान सहायता: वर्ष 2025-26 में 50 हजार मधुमक्खी कॉलोनियां और बॉक्स वितरित किए जा रहे हैं, जिस पर 8 करोड़ रुपये का अनुदान (40%) दिया जा रहा है।
- माइग्रेशन सहायता: अधिक तापमान या भोजन की कमी के समय मधुमक्खियों के प्रवास (Migration) के लिए 1,000 पालकों को 9 हजार रुपये प्रति पालक की सहायता दी जा रही है।
- उत्कृष्टता केंद्र (Centers of Excellence): राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत भरतपुर और टोंक में 10-10 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। यहाँ प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और गुणवत्ता जांच की सुविधा मिलेगी।
- उपकरण वितरण: 2 करोड़ रुपये की लागत से 1,000 मधुमक्खी पालकों को ‘मधुमक्खी पालन किट’ दी जा रही है।
भविष्य की संभावनाएं और निर्देश
कृषि मंत्री ने कहा कि राजस्थान का विशाल भौगोलिक क्षेत्र और यहाँ की विविध वनस्पतियां मधुमक्खी पालन के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे शहद के स्वास्थ्य लाभों का व्यापक प्रचार-प्रसार करें ताकि इसकी मांग और बाजार बढ़ सके। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मधुमक्खी पालकों की हर समस्या का प्राथमिकता से समाधान किया जाएगा।
इस सेमिनार में कृषि विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और प्रदेशभर से आए प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया, जहाँ मधुमक्खी पालन की वैज्ञानिक पद्धतियों पर चर्चा की गई।