मजदूरों के हक पर ठेकेदार की डकैती: 3 महीने से नहीं मिला वेतन, SECL छाल प्रबंधन के द्वार पहुंचे बिलखते श्रमिक

गणपत चौहान 

छाल/रायगढ़:

“साहब, पेट की आग अब बर्दाश्त नहीं होती… तीन महीने से चूल्हा सही से नहीं जला और जब अपना हक मांगते हैं, तो बदले में बदतमीजी मिलती है।” ये शब्द उन 35 लाचार मजदूरों के हैं, जो एसईसीएल (SECL) छाल उपक्षेत्र के आवासीय परिसरों और स्कूलों को चिलचिलाती धूप और गंदगी के बीच साफ-सुथरा रखते हैं। लेकिन विडंबना देखिए, दूसरों का परिसर साफ करने वालों की जिंदगी में ठेकेदार ने अंधेरा भर दिया है। पिछले तीन महीनों से वेतन न मिलने के कारण अब इन श्रमिकों का धैर्य जवाब दे गया है।

मेहनत की कमाई डकार रहा रसूखदार ठेकेदार

​मामला छाल उपक्षेत्र के डोमनारा, धरम, नावापारा आवासीय परिसर और डीएवी स्कूल का है। यहाँ स्वीपर और चपरासी के पद पर कार्यरत 35 मजदूरों को पिछले 90 दिनों से एक फूटी कौड़ी भी नसीब नहीं हुई है। मजदूरों का सीधा आरोप है कि ठेकेदार ऋतिक गोयल उनकी गाढ़ी कमाई पर कुंडली मारकर बैठा है। हद तो तब हो गई जब अपनी व्यथा सुनाने पहुंचे मजदूरों के साथ ठेकेदार और उसके स्टाफ ने बदतमीजी की और उन्हें डराया-धमकाया।

प्रबंधन का पल्ला झाड़ना, सवालों के घेरे में SECL

​जब पीड़ित मजदूर अपनी गुहार लेकर उपक्षेत्रीय प्रबंधन कार्यालय पहुँचे, तो प्रबंधन ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि “एसईसीएल की ओर से ठेकेदार को राशि का भुगतान किया जा चुका है।” अब यहाँ गंभीर सवाल खड़े होते हैं:

  1. ​जब प्रबंधन ने पैसा जारी कर दिया, तो वह राशि मजदूरों के घर पहुँचने के बजाय ठेकेदार की जेब में कैसे कैद हो गई?
  2. ​क्या SECL प्रबंधन की जिम्मेदारी सिर्फ चेक काटने तक सीमित है? क्या वे यह सुनिश्चित नहीं करेंगे कि जिस काम के लिए पैसा दिया गया, वह मजदूरों तक पहुँचा या नहीं?

पी.एफ. के नाम पर बड़ा खेल, भविष्य पर गिद्ध दृष्टि

​वेतन की चोरी तो सिर्फ ट्रेलर है, असली खेल तो पी.एफ. (PF) में चल रहा है। मजदूरों का कहना है कि उनके वेतन से कटौती तो दिखाई जाती है, लेकिन आज तक उन्हें पी.एफ. खाते या उसमें जमा राशि की कोई जानकारी नहीं दी गई। आशंका जताई जा रही है कि ठेकेदार न केवल वर्तमान की मजदूरी डकार रहा है, बल्कि मजदूरों के भविष्य की जमापूंजी में भी सेंध लगा रहा है।

प्रशासन की चुप्पी और व्यवस्था पर सवाल

​एक तरफ जिला प्रशासन ‘मजदूर हित’ के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं दूसरी तरफ नाक के नीचे खुलेआम शोषण हो रहा है।

    • ​क्या रसूखदार ठेकेदार के आगे प्रशासन नतमस्तक है?
    • ​भुगतान रुकने के बावजूद अब तक ठेकेदार पर FIR क्यों नहीं हुई?
    • ​क्या जिला कलेक्टर इस मानवीय त्रासदी का संज्ञान लेंगे?

​ भूखे पेट काम कर रहे इन मजदूरों का आक्रोश अब चरम पर है। यदि जल्द ही उनके हक का भुगतान नहीं किया गया, तो यह शांतिपूर्ण गुहार एक बड़े आंदोलन की चिंगारी बन सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी SECL प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की होगी।

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