मकर संक्रांति 2026: 14 या 15 जनवरी? जानें सटीक तिथि, शुभ मुहूर्त और स्नान-दान का महत्व

मकर संक्रांति 2026: 14 या 15 जनवरी? जानें सटीक तिथि, शुभ मुहूर्त और स्नान-दान का महत्व

| लोकेंद्र सिंह शेखावत

जयपुर। सनातन धर्म में मकर संक्रांति का पर्व विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। वर्ष 2026 में इस पर्व की तिथि को लेकर बन रहे असमंजस के बीच ज्योतिषीय गणनाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026, बुधवार को मनाई जाएगी।

​तारा ज्योतिष साधना केंद्र के पंडित रविंद्र आचार्य के अनुसार, संक्रांति का निर्धारण सूर्य के राशि परिवर्तन (गोचर) के आधार पर होता है। जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे ‘मकर संक्रांति’ कहा जाता है।

क्यों 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति है?

​आमतौर पर कई पर्व ‘उदया तिथि’ (सूर्योदय के समय की तिथि) के आधार पर अगले दिन मनाए जाते हैं, जिसके कारण कुछ विद्वान 15 जनवरी की बात कर रहे हैं। हालांकि, संक्रांति के मामले में नियम अलग है।

​पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 14 जनवरी 2026 को दोपहर 03:13 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। चूंकि सूर्य का यह गोचर सूर्यास्त से पहले हो रहा है, इसलिए शास्त्रों के अनुसार 14 जनवरी को ही संक्रांति मनाना शास्त्रसम्मत है। इसी दिन से सूर्य उत्तरायण होंगे और ‘खरमास’ (अशुभ समय) समाप्त होकर मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी।

शुभ मुहूर्त और पुण्य काल (14 जनवरी 2026)

​मकर संक्रांति पर स्नान और दान का फल ‘पुण्य काल’ में करने पर ही प्राप्त होता है। 2026 के लिए निर्धारित समय निम्नलिखित हैं:

विशेष काल

समय (दोपहर/शाम)

अवधि

पुण्य काल

दोपहर 03:13 से शाम 05:45 तक

02 घंटे 32 मिनट

महा पुण्य काल

दोपहर 03:13 से शाम 04:58 तक

01 घंटा 45 मिनट

नोट: शास्त्रों के अनुसार महा पुण्य काल में किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है और साधक के जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।

 

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व

  1. आत्मशुद्धि: इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का क्षय होता है।
  2. दान की महिमा: इस पर्व पर तिल, गुड़, अन्न, कंबल और घी का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है।
  3. सूर्य की उपासना: सूर्य के उत्तरायण होने से देवताओं का दिन आरंभ होता है, जो सकारात्मक ऊर्जा और आरोग्यता का प्रतीक है।

​यदि आप मकर संक्रांति के पूर्ण फल की प्राप्ति चाहते हैं, तो 14 जनवरी की दोपहर 03:13 बजे के बाद स्नान और दान की प्रक्रिया संपन्न करें। विशेषकर महा पुण्य काल (03:13 से 04:58) के दौरान पूजा-अर्चना करना श्रेष्ठ रहेगा।

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