मकर संक्रांति 2026: 14 जनवरी को होगा सूर्य का राशि परिवर्तन, षट्तिला एकादशी के संयोग ने बढ़ाया पर्व का महत्व

मकर संक्रांति 2026: 14 जनवरी को होगा सूर्य का राशि परिवर्तन, षट्तिला एकादशी के संयोग ने बढ़ाया पर्व का महत्व

| योगेश शर्मा

​जयपुर: नए साल 2026 का पहला प्रमुख हिंदू पर्व मकर संक्रांति 14 जनवरी को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन सूर्यदेव धनु राशि से निकलकर अपने पुत्र शनि की राशि ‘मकर’ में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सूर्य का यह संक्रमण 14 जनवरी को अपराह्न (दोपहर बाद) सवा तीन बजे होगा।

​शुभ मुहूर्त और पुण्यकाल का समय

​धार्मिक दृष्टि से संक्रांति के समय स्नान और दान का अक्षय फल मिलता है। इस वर्ष के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • ​संक्रांति प्रवेश: अपराह्न 3:13 बजे।
  • ​सामान्य पुण्यकाल: अपराह्न 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक (अवधि: 2 घंटे 32 मिनट)।
  • ​महा पुण्यकाल: अपराह्न 3:13 बजे से शाम 4:58 बजे तक (अवधि: 1 घंटा 45 मिनट)।

​संक्रांति का स्वरूप: ‘व्याघ्र’ पर सवार देवी

​इस वर्ष संक्रांति का वाहन व्याघ्र (बाघ) है। संक्रांति देवी ने पीतांबरी (पीले) वस्त्र धारण किए हैं और उनके हाथ में चांदी का पात्र (रजत पात्र) है। देवी का गमन पश्चिम दिशा की ओर हो रहा है, जो ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष फलदायी माना जा रहा है।

​षट्तिला एकादशी का विशेष संयोग: क्या चावल दान करें?

​इस बार मकर संक्रांति पर षट्तिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य पं. दिनेश शर्मा और डॉ. महेन्द्र मिश्रा के अनुसार:

  • ​दान में बाधा नहीं: एकादशी होने पर भी चावल और खिचड़ी का दान पूर्णतः शास्त्रसम्मत है। दान ग्रहण करने वाले पर एकादशी के नियम लागू नहीं होते।
  • ​सावधानी: केवल व्रत रखने वाले व्यक्ति को स्वयं चावल के सेवन से परहेज करना चाहिए। भगवान को तिल और चावल दोनों ही अर्पित किए जा सकते हैं।

​दान की महिमा और उनके फल

​मकर संक्रांति को ‘दान का महापर्व’ कहा जाता है। विभिन्न वस्तुओं के दान का महत्व इस प्रकार है:

दान की वस्तु

धार्मिक फल

तिल और खिचड़ी

शनि दोष से मुक्ति और अक्षय पुण्य।

कंबल और ऊनी वस्त्र

राहु के अशुभ प्रभाव से बचाव।

गुड़ और घी

करियर में उन्नति, गुरु और सूर्य की कृपा।

नमक और वस्त्र

नकारात्मक ऊर्जा का नाश और सुख-समृद्धि।

पशु चारा

गौ-सेवा से घर में खुशहाली।

राशियों पर प्रभाव: किसका चमकेगा भाग्य?

​ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार, सूर्य का मकर राशि में प्रवेश सभी 12 राशियों को प्रभावित करेगा:

  • ​लाभकारी राशियां: मेष, वृषभ, कर्क, सिंह, कन्या, वृश्चिक, धनु और मीन राशि वालों के लिए धन लाभ, पदोन्नति और भाग्य वृद्धि के योग हैं।
  • ​मिश्रित फल: मिथुन राशि के लिए यात्रा और खर्च के योग हैं। तुला राशि वालों को वाणी पर नियंत्रण रखना होगा।
  • ​सावधानी: मकर राशि वालों को क्रोध से बचना चाहिए, वहीं कुंभ राशि वालों को अज्ञात शत्रुओं और बढ़ते खर्चों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

​सांस्कृतिक महत्व

​मकर संक्रांति केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि पिता (सूर्य) और पुत्र (शनि) के मिलन का उत्सव है। राजस्थान सहित उत्तर भारत में इसे ‘खिचड़ी पर्व’ के रूप में मनाया जाता है, जहाँ दान-पुण्य के साथ-साथ पतंगबाजी की जीवंत परंपरा का निर्वहन किया जाता है।

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