मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक: भूमि आवंटन प्रस्तावों को मिली हरी झंडी, प्रदेश में स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति

जयपुर, 23 जून/ नरेश गुनानी/मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के चहुंमुखी विकास, जन-सुविधाओं के विस्तार और संस्थागत सुदृढ़ीकरण के लिए निरंतर नीतिगत निर्णय ले रही है। इसी क्रम में मंगलवार को शासन सचिवालय में उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय उप-समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

​बैठक में जयपुर, जोधपुर, कोटा व उदयपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में सार्वजनिक हित, उच्च शिक्षण संस्थान, स्वास्थ्य सेवाएं, सामाजिक कल्याण एवं औद्योगिक केंद्रों की स्थापना के लिए रियायती दरों पर भूमि आवंटन के विभिन्न प्रकरणों पर विस्तार से विचार-विमर्श कर सहमति जताई गई।

​बैठक में उपस्थित मंत्रिमंडल के सदस्य

​उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में सरकार के कई प्रमुख नीति-निर्माता शामिल हुए, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:

  • ​गजेंद्र सिंह (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री)
  • ​मदन दिलावर (शिक्षा मंत्री)
  • ​अविनाश गहलोत (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री)
  • ​झाबर सिंह खर्रा (नगरीय विकास एवं आवासन राज्य मंत्री, स्वतंत्र प्रभार)
  • ​इसके साथ ही संबंधित विभागों के तमाम वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।

​बैठक के मुख्य निर्णय और नीतिगत समीक्षा

​1. भूमि आवंटन प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा

​बैठक में जनहित, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण एवं शहरी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से संबंधित बिंदुओं की गहन समीक्षा की गई। समिति ने पात्र प्रकरणों में नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। शैक्षणिक एवं सामाजिक सरोकार से जुड़े संस्थानों के भूमि आवंटन प्रकरणों को प्राथमिकता से आगे बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की गई।

​2. स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर जोर

​प्रदेश में विशेषीकृत चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता तथा आमजन को बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराने से संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। समिति ने निर्देश दिए कि राज्य सरकार से लाभ प्राप्त (रियायती भूमि प्राप्त) संस्थाएं जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ आमजन तक पहुंचाएं। साथ ही, इन स्वास्थ्य संस्थानों में राज्य सरकार की विभिन्न चिकित्सा सहायता योजनाओं जैसे ‘मां योजना’ और ‘आरजीएचएस’ (RGHS) का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

​3. शहरी विकास एवं नागरिक सुविधाओं में राहत

​औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों को बड़ी राहत देते हुए भवन निर्माण में पेनल्टी पर छूट जैसे प्रकरणों पर सकारात्मक विचार-विमर्श किया गया। शेष प्रकरणों के समाधान के लिए प्रक्रियाओं में आवश्यक सरलीकरण, किश्तों में भुगतान की सुविधा तथा नियमानुसार ग्रेस पीरियड उपलब्ध कराने के सुझावों पर सहमति बनी।

​शहरी सेवा अभियान के अंतर्गत पट्टों सहित विभिन्न लाभों के वितरण में तेजी लाने और लंबित प्रकरणों का अधिकाधिक निस्तारण कर नागरिकों को राहत प्रदान करने के निर्देश दिए गए।

​4. पारदर्शी नगरीय कराधान व्यवस्था

​समिति ने नगरीय कराधान एवं शुल्क निर्धारण से संबंधित विषयों की समीक्षा की। पारदर्शिता लाने के लिए एक व्यावहारिक व्यवस्था विकसित करने हेतु आवश्यक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पात्रता के निर्धारित प्रावधानों का पूर्ण पालन सुनिश्चित हो सके।

​5. आरक्षित दरों से छूट के प्रकरणों पर विचार

​विभिन्न संस्थागत, शैक्षणिक, सामाजिक एवं सार्वजनिक उपयोग के भूमि आवंटन प्रकरणों में आरक्षित दरों (Reserve Price) से छूट के मामलों पर भी विचार किया गया। समिति ने जनहित एवं लोककल्याण की भावना को ध्यान में रखते हुए पात्र प्रकरणों को प्राथमिकता से निस्तारित करने पर सहमति व्यक्त की।

​“राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक विकास तथा शहरी आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। विभिन्न संस्थागत एवं जनोपयोगी परियोजनाओं के माध्यम से आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा विकास कार्यों को गति देने के लिए आवश्यक निर्णय समयबद्ध रूप से लिए जा रहे हैं।”

— डॉ. प्रेमचंद बैरवा, उपमुख्यमंत्री

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