मंडी में बाढ़ का कहर और कंगना रनौत का दौरा: सांसद की भूमिका और सीमाएं

मंडी में बाढ़ का कहर और कंगना रनौत का दौरा: सांसद की भूमिका और सीमाएं

टेलीग्राफ टाइम्स स्पेशल /Edited By : गौरव कोचर 
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 06,2025

मंडी/हिमाचल प्रदेश | 7 जुलाई 2025
हिमाचल प्रदेश में मानसून की एंट्री के साथ ही प्राकृतिक आपदाएं भारी तबाही मचा रही हैं। 20 जून को मानसून की दस्तक के बाद से राज्य में अब तक 78 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें अकेले मंडी जिले में 14 लोगों की जान गई है। बाढ़ और भूस्खलन से राज्य में 572 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है।

सांसद कंगना रनौत का आपदा क्षेत्र का दौरा

भारतीय जनता पार्टी की सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने 6 जुलाई को बाढ़ प्रभावित सिराज विधानसभा क्षेत्र का दौरा किया। वहां उन्होंने पीड़ितों से मुलाकात की और राज्य सरकार पर राहत को लेकर सवाल उठाए। कंगना ने कहा,

“मैं सांसद हूं, कोई कैबिनेट मंत्री नहीं। मेरे पास न अधिकारी हैं, न फंड, न संसाधन। केंद्र सरकार ने सेना भेजकर राहत शुरू की, लेकिन राज्य सरकार के पास फंड होते हुए भी वे सक्रिय नहीं दिख रहे।”

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र द्वारा दिया गया फंड राज्य सरकार के जरिए ही लोगों तक पहुंचता है, लेकिन राज्य सरकार फंड को सही तरीके से नहीं खर्च कर रही है। उन्होंने हिमाचल की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि

“ये लोग पैसा खाकर बैठे हैं।”

देरी से पहुंचने पर क्या बोलीं कंगना?

जब उनसे यह पूछा गया कि वह देरी से मंडी क्यों पहुंचीं, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि

“मैं अकेली हूं, मेरा कोई स्टाफ नहीं है। मेरे दो भाई साथ आते हैं, वही मेरी टीम हैं। मैं तुरंत पहुंचने की कोशिश करती हूं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण देरी हुई।”


एक सांसद की भूमिका: क्या वे आपदा में मदद नहीं कर सकते?

कई लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या कोई सांसद आपदा के समय अपने क्षेत्र की जनता की मदद नहीं कर सकता? इस सवाल का जवाब है “हां, कर सकता है”, लेकिन सीमाओं के साथ। आइए समझते हैं:

सांसद की मुख्य जिम्मेदारियां:

  1. कानून बनाना – संसद में विधेयक लाकर और पास कराना।
  2. जनप्रतिनिधित्व – अपने संसदीय क्षेत्र की जनता की समस्याओं को संसद और सरकार के सामने रखना।
  3. वित्तीय नियंत्रण – बजट और सरकारी खर्चों पर नजर रखना।
  4. नीतियों की निगरानी – सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की निगरानी करना।

सांसद निधि (MPLADS) से क्या मदद संभव है?

1993 में शुरू हुई सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत हर सांसद को हर साल 5 करोड़ रुपये दिए जाते हैं, जिसका उपयोग उनके क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए किया जा सकता है। यह फंड सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MOSPI) के अंतर्गत आता है।

Photo credit Telegraph Times

MPLADS से किए जा सकने वाले काम:

  • सड़क निर्माण
  • स्कूलों और अस्पतालों का निर्माण
  • पेयजल व्यवस्था
  • सामुदायिक भवन
  • स्ट्रीट लाइट्स और शौचालय जैसे बुनियादी ढांचे

आपदा के समय सांसद क्या कर सकता है?

  • राहत सामग्री और राशन की व्यवस्था के लिए सिफारिश कर सकता है
  • मेडिकल सहायता और राहत शिविरों की स्थापना में सहयोग कर सकता है
  • केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग कर सकता है
  • अपने MPLADS फंड से आपदा राहत कार्यों के लिए कुछ राशि की सिफारिश कर सकता है (विशेष मंजूरी की आवश्यकता होती है)

निष्कर्ष: सीमित लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका

सांसद की भूमिका सीधे राहत कार्यों में नहीं होती, लेकिन वे केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सेतु बनकर नीतिगत, आर्थिक और प्रशासनिक सहयोग की पहल कर सकते हैं। हालांकि कंगना रनौत का यह कहना कि उनके पास बिल्कुल फंड नहीं है, आधा सच है – उनके पास MPLADS जैसी योजनाएं होती हैं, जिनसे कुछ हद तक मदद की जा सकती है।

हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में जहां हर साल मानसून का तांडव देखने को मिलता है, वहां राज्य और केंद्र सरकार के बीच समन्वय, और स्थानीय सांसदों की सक्रिय भागीदारी ही लोगों को वास्तविक राहत दिला सकती है।


 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

Block title
Related

शीर्षक: ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान: डाबड़दुंबा विद्यालय में विद्यार्थियों ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश, किया पौधरोपण

जयपुर/टोडारायसिंह/योगेश शर्मा/टोडारायसिंह उपखंड क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय,...