गौरव कोचर
मंगोलिया में भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेषों की ऐतिहासिक 10 दिवसीय प्रदर्शनी का सफल समापन हो गया है। इस दौरान लगभग एक लाख श्रद्धालुओं ने अर्हंत सारिपुत्र और अर्हंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेषों के दर्शन किए। संस्कृति मंत्रालय के तहत भारतीय राष्ट्रीय संग्रहालय ने मध्य प्रदेश सरकार, श्रीलंका की महाबोधि सोसाइटी और इंटरनेशनल बुद्धिष्ट कॉन्फेडरेशन (आईबीसी) के सहयोग से उलानबातर स्थित गंडन तेगचेनलिंग मठ में 31 मई से 9 जून, 2026 तक इस प्रदर्शनी का आयोजन किया था।

प्रधानमंत्री की घोषणा और सभ्यतागत संबंध
इस ऐतिहासिक प्रदर्शनी की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अक्टूबर 2025 में मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना की भारत यात्रा के दौरान की थी। भारत और मंगोलिया बौद्ध धर्म पर आधारित गहरे सभ्यतागत और आध्यात्मिक संबंध साझा करते हैं। लगभग 34 लाख की आबादी वाले मंगोलिया में इस आयोजन को लेकर भारी उत्साह देखा गया और 10 दिनों में एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मठ में हाजिरी लगाई। अब तक ये पवित्र अवशेष केवल थाईलैंड और मंगोलिया ही भेजे गए हैं।

विशेष प्रदर्शनियों का आयोजन
प्रदर्शनी के दौरान भारतीय राष्ट्रीय संग्रहालय और इंटरनेशनल बुद्धिष्ट कॉन्फेडरेशन द्वारा बौद्ध धर्म पर तीन विशेष प्रदर्शनियां भी आयोजित की गईं, जिन्हें आम जनता, भिक्षुओं और विद्वानों द्वारा काफी सराहा गया:

- सारिपुत्त और मोग्गलाना: ज्ञान, भक्ति और अवशेषों की यात्रा (आईबीसी द्वारा)
- भारत से मंगोलिया तक: आंतरिक एशिया में बुद्ध धम्म का प्रसार (आईबीसी द्वारा)
- प्रकाश के पात्र: प्रतिमा विज्ञान, अवशेष और धम्म का मार्ग – भारत के संग्रहालय संग्रहों के माध्यम से शाक्यमुनि बुद्ध की यात्रा (भारतीय राष्ट्रीय संग्रहालय द्वारा)
राष्ट्राध्यक्ष का दर्जा और प्रोटोकॉल
सुरक्षा और सम्मान के लिहाज से इन पवित्र अवशेषों को राष्ट्राध्यक्ष का दर्जा प्राप्त है। इन्हें 30 मई, 2026 को भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से मंगोलिया ले जाया गया था, जहां असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने इन्हें मंगोलिया के शिक्षा मंत्री एनख-अमगलान और गंडांटेगचेनलिंग मठ के खंबा नोमुन खान गेशे लहारम्पा डी जावज़ांडोरज को सौंपा था।
10 दिवसीय आयोजन के बाद, लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल इन अवशेषों को सुरक्षित रूप से भारत वापस ले आया है।
समापन समारोह और मित्रता का प्रतीक
गंडन तेगचेनलिंग मठ में आयोजित समापन और विदाई समारोह में मंगोलिया सरकार के मंत्रियों, लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, श्रीलंका के महाबोधि सोसाइटी के अध्यक्ष बनगला उपतिस्सा थेरो और आईबीसी के महासचिव शारत्से खेनसुर रिनपोचे जांगचुप चोडेन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने इस सफल आयोजन के लिए भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया।
अटूट मित्रता का प्रतीक:
प्रस्थान से पहले हवाई अड्डे पर, मंगोलिया में भारत के राजदूत अतुल मलहारी गोत्सुर्वे ने लद्दाख के उपराज्यपाल को एक मंगोलियाई पौधा भेंट किया। इस पौधे को लद्दाख में भारत और मंगोलिया के बीच अटूट मित्रता और आध्यात्मिक बंधन के प्रतीक के रूप में लगाया जाएगा।