भ्रष्टाचार में लिप्त कार्मिकों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई, विभाग में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति: जोराराम कुमावत
| नरेश गुनानी
जयपुर, 6 मार्च 2026 पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने शुक्रवार को विधानसभा में स्पष्ट किया कि पशुपालन विभाग भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहा है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि भ्रष्टाचार के किसी भी प्रकरण में विभागीय स्तर पर अभियोजन स्वीकृति की कोई भी कार्रवाई लंबित नहीं है।
तत्कालीन संयुक्त निदेशक पर कड़ी कार्रवाई
लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर जवाब देते हुए मंत्री ने सीकर जिले का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा तत्कालीन संयुक्त निदेशक डॉ. दीपक अग्रवाल के विरुद्ध की गई कार्रवाई के बाद विभाग ने तुरंत कदम उठाए हैं।
- संबंधित कार्मिक को निलंबित कर दिया गया है।
- 16 CCए के तहत नोटिस और चार्जशीट जारी की जा चुकी है।
- विभागीय स्तर पर अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) दे दी गई है।
- जांच को प्रभावित होने से बचाने के लिए कार्मिक का मुख्यालय निदेशालय जयपुर कर दिया गया है।
ऑपरेशन सिंदूर: रिक्तियों को भरने के लिए किए गए तबादले
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमावर्ती जिलों में किए गए स्थानांतरणों पर जानकारी देते हुए जोराराम कुमावत ने बताया कि पशुधन सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 39 पशु चिकित्सकों और 93 अधीनस्थ कार्मिकों को गंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर भेजा गया था।
तबादलों के पीछे का मुख्य कारण इन जिलों में बड़ी संख्या में रिक्तियां होना था:
- बीकानेर: 35.56% पद रिक्त थे।
- गंगानगर: 27.85% पद रिक्त थे।
- जैसलमेर: 27.24% पद रिक्त थे।
- बाड़मेर: 26% से अधिक पद रिक्त थे।
मंत्री ने बताया कि इन स्थानांतरणों से संबंधित जो भी मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं, विभाग वहां न्यायिक आदेशों की पूर्ण पालना कर रहा है। इसी क्रम में 9 पशु चिकित्सा अधिकारियों को उनके पूर्व पदस्थापन स्थानों पर वापस भेजा जा चुका है।
विभाग में पदोन्नति का दौर
पशुपालन मंत्री ने यह भी जानकारी साझा की कि विभाग द्वारा अपने कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने और प्रशासनिक मजबूती के लिए 1155 कार्मिकों को पदोन्नति (Promotion) प्रदान की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि पशु चिकित्सा और पशुपालकों की सेवाओं में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए।
