भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार: निलंबित IAS समीर विश्नोई की 20 करोड़ की संपत्ति कुर्क, पत्नी के नाम बनाई थी फर्जी फर्में

गणपत चौहान 

रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित कोल लेवी और डीएमएफ (DMF) घोटाले में नामजद 2010 बैच के निलंबित आईएएस अधिकारी समीर विश्नोई की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रायपुर की एसीबी-ईओडब्ल्यू (ACB-EOW) स्पेशल कोर्ट के आदेश पर एजेंसी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विश्नोई की लगभग 20 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को अटैच (सीज) कर लिया है।

​लंबे समय तक जेल में रहने के बाद हाल ही में जमानत पर बाहर आए विश्नोई के खिलाफ यह एजेंसी का अब तक का सबसे कड़ा वित्तीय प्रहार माना जा रहा है।

अवैध कमाई को छिपाने के लिए पत्नी का सहारा

​जांच एजेंसियों की तफ्तीश में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, समीर विश्नोई ने भ्रष्टाचार के जरिए अर्जित की गई काली कमाई को सफेद करने के लिए अपनी पत्नी प्रीति विश्नोई के नाम पर लगभग आधा दर्जन फर्जी फर्में (Shell Companies) बनाई थीं।

  • निवेश का तरीका: आईएएस दंपति इन फर्मों के जरिए बेनामी संपत्तियों, कीमती प्लॉट और बड़े भू-खंडों में निवेश करते थे।
  • मनी लॉन्ड्रिंग: जांच में सामने आया है कि इन फर्मों का इस्तेमाल केवल अवैध पैसों को अचल संपत्ति में बदलने के लिए किया गया था।

कहां-कहां हुई जब्ती? (संपत्तियों का विवरण)

​एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीम ने महासमुंद से लेकर राजधानी रायपुर तक फैले विश्नोई के ‘साम्राज्य’ पर शिकंजा कसा है। जब्त की गई संपत्तियों में मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • महासमुंद जिला: यहाँ लगभग 22 एकड़ की बेशकीमती कृषि और व्यावसायिक भूमि को सीज किया गया है।
  • नया रायपुर: नवा रायपुर के प्राइम लोकेशन पर स्थित कई प्लॉट अटैच किए गए हैं।
  • रायपुर शहर: पॉश इलाके गायत्री नगर में स्थित उनके आलीशान मकान को भी एजेंसी ने अपनी कस्टडी में ले लिया है।

घोटालों की लंबी फेहरिस्त

​समीर विश्नोई का नाम प्रदेश के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में प्रमुखता से दर्ज है। उन पर मुख्य रूप से निम्नलिखित मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है:

  1. कोल खनन परिवहन घोटाला: कोयला ढुलाई में अवैध लेवी वसूली का मामला।
  2. DMF घोटाला: जिला खनिज संस्थान न्यास की राशि में बड़े पैमाने पर अनियमितता।
  3. चिप्स (CHiPS) घोटाला: आईटी विभाग के अंतर्गत निविदाओं और खरीद में गड़बड़ी के आरोप।

एजेंसी का अगला कदम

​विशेष अदालत के आदेश के बाद इन संपत्तियों के हस्तांतरण या बिक्री पर पूर्णतः रोक लगा दी गई है। ईओडब्ल्यू के अधिकारियों का कहना है कि संपत्तियों की कुर्की के बाद अब उन ‘बेनामी’ लेनदारों की तलाश की जा रही है, जिनके जरिए इन फर्मों में पैसा रोटेट किया गया था। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ अन्य करीबियों पर भी गाज गिर सकती है।

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