नरेश गुनानी
जयपुर, 09 जून। राजस्थान राज्य बीज निगम ने प्रशासनिक शुचिता और निगम के हितों को सर्वोपरि रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। निगम के अशासकीय निदेशक जुगल किशोर (पुत्र सतपाल) को निदेशक मंडल के सदस्य पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। भ्रष्टाचार के मामले में नाम सामने आने के बाद यह कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
एसीबी की कार्रवाई के बाद गिरी गाज
उल्लेखनीय है कि जुगल किशोर का मनोनयन इसी वर्ष 10 फरवरी 2026 को राजस्थान राज्य बीज निगम की 47वीं वार्षिक साधारण सभा में निदेशक मंडल के सदस्य (निदेशक) के पद पर किया गया था।
हाल ही में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में जुगल किशोर को गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी के बाद निगम की साख, पारदर्शिता और जनविश्वास को बनाए रखने के उद्देश्य से सरकार और निगम प्रबंधन ने उन्हें तुरंत पद से बेदखल करने का निर्णय लिया।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति
राजस्थान राज्य बीज निगम प्रबंधन ने इस कार्रवाई को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है:
- नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता: संस्था की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
- शून्य सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस): निगम किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितता के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति पर काम करता है।
- संस्थागत गरिमा सर्वोपरि: सार्वजनिक संस्थाओं में आमजन और विशेषकर किसानों का विश्वास बनाए रखने के लिए उच्च नैतिक मानकों का पालन बेहद आवश्यक है।
निगम प्रशासन ने प्रदेश के किसानों और सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) को आश्वस्त किया है कि उनके हितों की रक्षा और संस्था की गरिमा को बनाए रखने के लिए भविष्य में भी ऐसे सख्त और जरूरी कदम उठाए जाते रहेंगे।