भू माफियाओं का कब्जा, प्रशासन की चुप्पी: अजमेर की करोड़ों की सरकारी जमीन पर बढ़ता खतरा

भू माफियाओं का कब्जा, प्रशासन की चुप्पी: अजमेर की करोड़ों की सरकारी जमीन पर बढ़ता खतरा
प्रशासनिक निष्क्रियता और रसूखदारों की मिलीभगत से गंभीर होते हालात

Edited By : गौरव कोचर 
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 02,2025

(हरिप्रसाद शर्मा) अजमेर।
अजमेर के लोहागल क्षेत्र में अजमेर विकास प्राधिकरण (एडीए) की करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि पर भू माफियाओं का कब्जा लगातार गहराता जा रहा है। मामला खसरा नंबर 682 और 607 (पुराना खसरा नंबर 1514 व 1515) से जुड़ा है, जो कि लोहागल जनाना अस्पताल मार्ग पर स्थित है। इस जमीन पर ‘कबीर गार्डन’ नामक शादी समारोह स्थल का संचालन किया जा रहा है, जो कि पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधि है।

व्यावसायिक परिसर बना, पर कार्रवाई ठप
भूमि की वर्तमान बाजार कीमत लगभग तीन करोड़ रुपये आंकी गई है। इस भूमि पर पक्की चारदीवारी, भवन, बिजली कनेक्शन और बोरिंग जैसी पूर्ण सुविधाओं के साथ व्यावसायिक ढांचा विकसित किया गया है। जबकि रिकॉर्ड के अनुसार यह भूमि यूआईटी (अब एडीए) के नाम दर्ज है और वर्ष 2012 में इसे सार्वजनिक उपयोग के लिए श्री कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी स्मृति संस्थान को आवंटित किया गया था।

Photo credit Telegraph Times

आवंटन में मात्र 800 वर्गगज क्षेत्र में निर्माण की अनुमति थी, लेकिन मौके पर 1377.77 वर्गगज पर निर्माण पाया गया है — जो कि स्वीकृत क्षेत्र से करीब 500 वर्गगज अधिक है। यह स्पष्ट रूप से एडीए एक्ट 2013 का गंभीर उल्लंघन है।

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं
सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार मुरारीलाल शर्मा ने प्रेसवार्ता कर बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायतें 26 दिसंबर 2024 और 28 अप्रैल 2025 को राज्य सरकार को भेजीं थीं। जांच में अतिक्रमण की पुष्टि भी हुई और एडीए ने नोटिस संख्या 69/2025 के तहत नोटिस जारी किया, परंतु छह माह बीत जाने के बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 11 जून 2025 को एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कार्यक्रम में स्वयं मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार ने इस पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद फाइलों में धूल जम रही है, और भू माफिया जमीन का धड़ल्ले से व्यावसायिक उपयोग कर रहे हैं।

गरीब पर त्वरित कार्रवाई, रसूखदारों पर चुप्पी
मुरारीलाल शर्मा ने दोहरे मापदंडों का आरोप लगाते हुए बताया कि प्रकरण संख्या 13/2024 में एक गरीब विधवा महिला शालू शर्मा का तीन मंजिला मकान मात्र डेढ़ माह में तोड़ दिया गया, जबकि उस पर न्यायालय का स्थगन आदेश भी मौजूद था। इस कार्रवाई में महिला को लगभग 40 लाख रुपये का नुकसान हुआ।

RTI में भी पारदर्शिता नहीं
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 और लोक सूचना गारंटी अधिनियम 2013 के तहत पत्रावली की प्रतिलिपियां मांगने के बावजूद एडीए ने अब तक दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाए हैं। यह न केवल पारदर्शिता की अवहेलना है, बल्कि जनहित के अधिकारों का खुला उल्लंघन भी है।

प्रशासनिक निष्क्रियता या सियासी दबाव?
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या एडीए एक्ट 2013 केवल कमजोर और आम नागरिकों पर कार्रवाई का औजार बन गया है? जब सरकार के शीर्ष अधिकारी भी कार्रवाई के निर्देश दे चुके हैं, तब भी यदि फाइलों से न्याय नहीं निकल रहा, तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर स्तर की मिलीभगत और भ्रष्टाचार का संकेत देता है।

यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला कानून, व्यवस्था और जनविश्वास — तीनों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। साथ ही यह भविष्य में भू माफियाओं को और बढ़ावा देने वाला खतरनाक उदाहरण साबित हो सकता है।


 

spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

अजमेर से गूँजेगा ‘विकसित राजस्थान’ का शंखनाद: पीएम मोदी करेंगे 23,500 करोड़ की सौगातों की बौछार

अजमेर से गूँजेगा 'विकसित राजस्थान' का शंखनाद: पीएम मोदी...