जयपुर, 23 जून/ योगेश शर्मा/जब भीषण गर्मी और बढ़ते पारे ने ग्रामीण इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया और पानी की किल्लत ने आम जिंदगी को मुहाल कर दिया, तब जयपुर के एक छोटे से इलाके में इंसानियत और जनसेवा की एक बेहद अनूठी मिसाल सामने आई है। क्षेत्र के रामजीलाल इस जल संकट के दौर में 400 से अधिक परिवारों के लिए किसी मसीहा से कम साबित नहीं हो रहे हैं। उन्होंने निस्वार्थ भाव से सरकारी ट्यूबवेल का जिम्मा संभालकर पूरे गांव को राहत पहुंचाई है।
नेवटा से रातल्या गांव तक का सफर: रोज़ का कड़ा इम्तिहान
रामजीलाल की इस जनसेवा की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। वे रोज़ाना भीषण धूप और चिलचिलाती गर्मी की परवाह किए बिना रातल्या गांव से नेवटा तक का सफर तय करते हैं।
- दौड़भाग और देखरेख: नेवटा पहुंचकर वे सुबह-सुबह सरकारी ट्यूबवेल को चालू करते हैं और उसकी पूरी देखरेख करते हैं।
- समान वितरण: ट्यूबवेल से पानी की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के बाद वे रातल्या गांव आते हैं और वहां के अलग-अलग मोहल्लों में पानी का व्यवस्थित और न्यायसंगत वितरण करवाते हैं।
तेज धूप, लू और कठिन परिस्थितियों के बावजूद रामजीलाल प्रतिदिन इस दिनचर्या का पालन कर रहे हैं ताकि ग्रामीणों को समय पर पानी मिल सके।
महिलाओं, बुजुर्गों और पशुपालकों को मिली बड़ी राहत
गांव के कई मोहल्ले लंबे समय से पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही थी। रामजीलाल की इस पहल से:
- महिलाओं को पानी के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों और कुओं के चक्कर काटने से मुक्ति मिली है।
- बुजुर्गों और घर के अन्य सदस्यों का समय और श्रम बच रहा है।
- बेजुबान पशुओं और पशुपालकों के लिए इस तपती गर्मी में पानी की उपलब्धता किसी वरदान जैसी साबित हो रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि रामजीलाल समय पर आगे आकर इस ट्यूबवेल को सुचारू रूप से संचालित न करते, तो इस जानलेवा गर्मी में पूरा गांव पानी के संकट से त्राहि-त्राहि कर उठता।
क्षेत्रभर में सराहना: इंसानियत की जीती-जागती मिसाल
आज के दौर में जहां लोग अपनी निजी व्यस्तताओं से बाहर नहीं निकल पाते, वहीं रामजीलाल बिना किसी निजी स्वार्थ या लोभ के पूरी निष्ठा के साथ इस पुनीत कार्य में जुटे हैं। उनकी इस निस्वार्थ सेवा की चर्चा अब रातल्या और नेवटा सहित पूरे क्षेत्र में फैल चुकी है।
”भीषण गर्मी के इस दौर में पानी पिलाने से बढ़कर दुनिया में कोई दूसरी सेवा नहीं हो सकती। रामजीलाल ने सिर्फ एक सरकारी ट्यूबवेल नहीं चलाया है, बल्कि संकट की इस घड़ी में 400 परिवारों को सहारा देकर यह साबित कर दिया है कि समाज के प्रति समर्पण और इंसानियत की भावना आज भी जिंदा है।”
— स्थानीय ग्रामीण
गांव के प्रबुद्ध नागरिकों और युवाओं ने रामजीलाल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी यह जनसेवा समाज के हर वर्ग के लिए एक बेहतरीन प्रेरणास्रोत है।