गनपत चौहान
रायपुर/जशपुर, 5 मई 2026। छत्तीसगढ़ में पारा चढ़ने के साथ ही बढ़ती भीषण गर्मी के बीच राज्य सरकार आमजन को राहत देने के लिए युद्धस्तर पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संवेदनशील निर्देशों का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। इसी कड़ी में जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड अंतर्गत ग्राम सपघरा के सुखबासुपारा में वर्षों पुरानी पेयजल समस्या का समाधान करते हुए नलकूप खनन का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है।
सीएम कैंप कार्यालय की त्वरित कार्रवाई
सुखबासुपारा के ग्रामीण लंबे समय से पानी की किल्लत से जूझ रहे थे। भीषण गर्मी में यह समस्या और भी विकराल हो गई थी। ग्रामीणों ने अपनी इस पीड़ा को मुख्यमंत्री तक पहुँचाने के लिए सीएम कैंप कार्यालय, बगिया में एक आवेदन प्रस्तुत किया था।
मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए बिना समय गंवाए नलकूप खनन की प्रक्रिया शुरू की और उसे रिकॉर्ड समय में पूरा कर लिया।
गाँव में खुशी का माहौल, दूर हुई जल संकट की चिंता
नलकूप से पानी की पहली धार निकलते ही सुखबासुपारा में उत्सव जैसा माहौल बन गया। अब ग्रामीणों को भीषण चिलचिलाती धूप में पानी भरने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।
ग्रामीणों ने साझा की अपनी खुशी:
- पानी की सुलभता: अब घर के पास ही स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा राहत मिली है।
- समय की बचत: पानी लाने में लगने वाला घंटों का समय अब अन्य रचनात्मक कार्यों में उपयोग हो सकेगा।
- स्वास्थ्य सुरक्षा: सरकारी नलकूप होने से शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।
मुख्यमंत्री और प्रशासन का जताया आभार
इस त्वरित समाधान के लिए ग्रामवासियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन का हृदय से आभार व्यक्त किया है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की इस संवेदनशीलता ने उन्हें इस भीषण गर्मी में एक बड़ी सौगात दी है।
”यह केवल एक नलकूप नहीं, बल्कि हमारे गाँव के लिए जीवन की एक नई धारा है। मुख्यमंत्री ने हमारी पुकार सुनी और हमें प्यास से निजात दिलाई।” — स्थानीय निवासी
मिशन मोड में प्रशासन
राज्य सरकार के निर्देशानुसार, प्रदेश के उन सभी क्षेत्रों को चिन्हित किया जा रहा है जहाँ गर्मी के कारण जल स्तर नीचे चला गया है या पेयजल की किल्लत है। प्रशासन द्वारा प्राथमिकता के आधार पर नए नलकूप खनन, खराब हैंडपंपों की मरम्मत और टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है ताकि ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत किसी भी नागरिक को पानी की कमी न हो।