भालूमार में पर्यावरण का चीरहरण:

भालूमार में पर्यावरण का चीरहरण: 10 एकड़ भूमि पर खड़े सैकड़ों फलदार वृक्षों पर चली मशीनें, प्रशासन मौन

| रिपोर्ट गणपत चौहान छत्तीसगढ़

घरघोड़ा (रायगढ़)। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के घरघोड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम भालूमार में पर्यावरण संरक्षण के नियमों को ताक पर रखकर फलदार और औषधीय वृक्षों की बलि दी जा रही है। एक निजी भूखंड पर बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के भारी मशीनों के जरिए वर्षों पुराने पेड़ों को जड़ से उखाड़ने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस अवैध कटाई से जहाँ क्षेत्र के ग्रामीण आक्रोशित हैं, वहीं जिम्मेदार विभागों की चुप्पी ने मिलीभगत की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।

10 एकड़ में फैले ‘प्राकृतिक खजाने’ पर हमला

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह अवैध कटाई ग्राम बजरमुडा निवासी निशा पटेल (पति कन्हैया लाल पटेल) द्वारा हाल ही में खरीदी गई लगभग 10 एकड़ भूमि पर की जा रही है। इस भूमि पर दशकों पुराने आम, महुआ, कटहल, अमरूद, जामुन, इमली, बेल, सीताफल, बहेड़ा, हर्रा और आंवला जैसे बेशकीमती फलदार एवं औषधीय वृक्ष मौजूद थे। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि अब तक 15 से अधिक विशालकाय वृक्षों को धराशायी किया जा चुका है और कटाई का काम अभी भी बेखौफ जारी है।

कानून और नियमों की खुलेआम धज्जियां

​छत्तीसगढ़ वृक्ष संरक्षण अधिनियम के तहत किसी भी फलदार या बहुवर्षीय वृक्ष की कटाई के लिए राजस्व एवं वन विभाग से लिखित अनुमति अनिवार्य है। नियमानुसार:

  • ​वृक्ष की कटाई से पूर्व विभाग द्वारा मौका मुआयना किया जाता है।
  • ​कटाई के बदले नए वृक्षारोपण की शर्त रखी जाती है।
  • ​लेकिन इस मामले में न तो वन विभाग और न ही राजस्व विभाग से कोई वैधानिक स्वीकृति ली गई है।

प्रशासनिक उदासीनता: क्या है संरक्षण का रहस्य?

​हैरानी की बात यह है कि दिनदहाड़े भारी मशीनों (JCB/Chain-poclain) का उपयोग कर पेड़ों को उखाड़ा जा रहा है, जिसकी आवाज और गतिविधि से पूरा क्षेत्र वाकिफ है, परंतु प्रशासनिक अमला अब तक मौके पर नहीं पहुँचा। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध कटाई की सूचना संबंधित अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन न तो स्थल निरीक्षण किया गया और न ही मशीनों को जब्त किया गया। अधिकारियों की यह निष्क्रियता उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

पर्यावरण पर गहराता संकट

​पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की सामूहिक वृक्ष कटाई से स्थानीय जैव विविधता को अपूरणीय क्षति पहुँचती है। इससे न केवल क्षेत्र के भू-जल स्तर में गिरावट आएगी, बल्कि स्थानीय तापमान में वृद्धि और वन्यजीवों के आवास भी नष्ट होंगे।

ग्रामीणों की मांग

​स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर रायगढ़ से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने, दोषियों के विरुद्ध पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और कटाई पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।

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