सुनील शर्मा
नई दिल्ली: भारी उद्योग मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की 8वीं बैठक बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने की। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु मंत्रालय और उसके अधीन आने वाले सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) में हिंदी के व्यावहारिक प्रयोग को बढ़ावा देना और उसे अधिक प्रभावी बनाना रहा।
बैठक में सांसद बाँसुरी स्वराज, सीमा द्विवेदी, सतीश कुमार गौतम, भोला सिंह सहित कई हिंदी विद्वान और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

हिंदी सांस्कृतिक विरासत की धरोहर: राज्य मंत्री
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने कहा कि भारत की सभी भाषाएं हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं और हिंदी देश को भावनात्मक रूप से जोड़ने का सूत्र है। उन्होंने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी में संवाद करने से वैश्विक स्तर पर इसकी प्रतिष्ठा बढ़ी है।
मंत्री ने सरकारी कामकाज में सरल, व्यावहारिक और सहज हिंदी के उपयोग पर बल दिया। उन्होंने मंत्रालय की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया:
- बीएचईएल (BHEL) को पिछले दो वर्षों में दो बार ‘राजभाषा कीर्ति’ पुरस्कार से नवाजा गया है।
- कर्मचारियों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए वार्षिक गृह पत्रिका ‘उद्योग भारती’ और हिंदी पखवाड़ा जैसे कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया जा रहा है।
डिजिटल तकनीक और ई-टूल्स का समन्वय
भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव कामरान रिजवी ने बताया कि राजभाषा विभाग और संसदीय राजभाषा समिति के निर्देशों का मंत्रालय में कड़ाई से पालन किया जा रहा है। हिंदी को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए कई कदम उठाए गए हैं:
- ई-टूल्स का प्रशिक्षण: यूनिकोड टाइपिंग, हिंदी स्पेल-चेकर, अनुवाद सॉफ्टवेयर और वॉइस-टू-टेक्स्ट जैसी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- ई-ऑफिस: डिजिटल फाइलिंग और ई-ऑफिस प्रणालियों में हिंदी के प्रयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
- पुस्तकालय: मंत्रालय और उसके उपक्रमों में हिंदी ई-पुस्तकालयों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्रमुख संस्थानों की सक्रिय भागीदारी
संयुक्त सचिव विजय मित्तल ने जानकारी दी कि मंत्रालय के अधीनस्थ संस्थानों में 25 पुस्तकालयों का नवनिर्माण और जीर्णोद्धार किया गया है। बैठक के दौरान बीएचईएल, एचएमटी लिमिटेड, राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंट्स लिमिटेड (रील), सीमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और आईकैट जैसे उपक्रमों ने अपनी हिंदी गतिविधियों और तकनीकी हिंदी के प्रयोग पर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं।
समिति के सदस्यों और हिंदी विद्वानों ने सुझाव दिया कि तकनीकी माध्यमों में सरल भाषा का प्रयोग किया जाए और युवाओं के बीच हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएं।