भारत-यूरोप इंडस्ट्रियल पार्टनरशिप का नया अध्याय: पीएम ने यूरोपीय दिग्गजों को दिया ‘Intent से Investment’ का मंत्र

प्रीति बालानी 

गोथनबर्ग:

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत ने यूरोपीय संघ (EU) के सामने खुद को एक स्थिर, भरोसेमंद और सबसे तेजी से बढ़ते बाजार के रूप में पेश किया है। गोथनबर्ग में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री ने यूरोपीय देशों की दिग्गज कंपनियों के CEOs को संबोधित करते हुए कहा कि भारत आज 140 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं, युवा आबादी और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।

​उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले 12 वर्षों में भारत ‘Reform, Perform और Transform’ (सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन) के मूलमंत्र पर चला है, जिससे देश में बिजनेस कल्चर पूरी तरह बदल चुका है।

​4 स्तंभ जिन्होंने बदला भारत का बिजनेस कल्चर

​प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में उन प्रमुख आर्थिक सुधारों का जिक्र किया, जिन्होंने भारत में व्यापार को सुगम (Ease of Doing Business) बनाया है:

    • One Nation, One Tax: GST के लागू होने से भारत एक एकीकृत और पारदर्शी बाजार बना है।
    • Accountability (जवाबदेही): Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) ने देश के बिजनेस कल्चर में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय की है।
    • Manufacturing को गति: कॉर्पोरेट टैक्स में सुधार और लेबर कोड्स के सरलीकरण से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया गया है।
    • Global Capital और PLI स्कीम्स: FDI सुधारों ने विदेशी पूंजी के लिए रास्ते खोले हैं, जबकि PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) स्कीम्स ने इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, ऑटो, सोलर और टेक्सटाइल जैसेक्टर्स में मैन्युफैक्चरिंग को जबरदस्त रफ्तार दी है।

​”हमने हजारों पुराने और अप्रासंगिक कानूनों (Outdated Regulations) को समाप्त कर दिया है। आज डिजिटल इंडिया की वजह से पब्लिक सर्विसेज अधिक पारदर्शी, कुशल और सुलभ हो चुकी हैं।”

 

​यूरोपीय कंपनियों के सामने रखे सहयोग के 5 बड़े सुझाव

​भारत ने अपनी प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए यूरोपीय कंपनियों के सामने पांच प्रमुख क्षेत्रों (Sectors) में सहयोग का खाका पेश किया:

​1. टेलीकॉम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (5G से 6G की ओर)

      • सहयोगी कंपनियां: Vodafone, Ericsson, Nokia, Orange आदि।
      • विजन: भारत में 5G के सफल रोलआउट के बाद अब फोकस 6G ट्रांजिशन, AI-इनेबल्ड नेटवर्क्स और सिक्योर कनेक्टिविटी पर है। पीएम ने इन कंपनियों को भारत को Global R&D Hub बनाने का न्यौता दिया।

​2. डीप-टेक और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम

      • सहयोगी कंपनियां: ASML, NXP, SAP, Capgemini आदि।
      • विजन: भारत एंड-टू-एंड टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम विकसित कर रहा है। पीएम ने कहा कि टेक्नोलॉजी इनोवेशन की अगली वैश्विक लहर भारत में Co-create (सह-निर्मित) होनी चाहिए।

​3. ग्रीन ट्रांजिशन और क्लीन एनर्जी

      • सहयोगी कंपनियां: ENGIE, Total Energies, Shell, Umicore आदि।
      • विजन: ग्रीन हाइड्रोजन, एनर्जी स्टोरेज, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और डीकार्बोनाइजेशन के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश की संभावनाएं हैं। भारत ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे रहा है।

​4. इंफ्रास्ट्रक्चर, मोबिलिटी और अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन

      • सहयोगी कंपनियां: Volvo, Maersk, Airbus, Saab, ArcelorMittal, Heidelberg आदि।
      • विजन: सस्टेनेबल सीमेंट, ग्रीन स्टील, लॉजिस्टिक्स, एयरोस्पेस और डिफेंस जैसे क्षेत्रों में भारत-यूरोप की साझेदारी दुनिया को वर्ल्ड-क्लास आउटपुट दे सकती है।

​5. हेल्थकेयर और लाइफ साइंसेज (Next Level Partnership)

      • सहयोगी कंपनियां: AstraZeneca, Roche, Merck, Philips, Nestlé, Unilever आदि।
      • विजन: वैक्सीन, कैंसर केयर, डिजिटल हेल्थ और मेडिकल डिवाइसेज के क्षेत्र में निवेश की भारी संभावनाएं हैं। कंपनियों को ‘Design for India, Make in India, and Export from India’ के मॉडल पर काम करना चाहिए।

​यूरोपीय CEOs को दिया 5 साल का ‘Flagship Challenge’

​सिर्फ सुझावों तक सीमित न रहते हुए, प्रधानमंत्री ने यूरोपीय बिजनेस लीडर्स के सामने एक सीधी चुनौती (Challenge) भी रखी। उन्होंने पूछा: “क्या यहाँ मौजूद हर कंपनी अगले 5 वर्षों के लिए भारत में एक नए बड़े फ्लैगशिप प्रोजेक्ट की पहचान कर सकती है?”

​उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत सरकार इन सभी प्रोजेक्ट्स को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसकी नियमित समीक्षा के लिए एक संस्थागत व्यवस्था (Institutional Mechanism) भी बनाई जाएगी।

​साझेदारी को मजबूत करने के लिए 3 रणनीतिक कदम

​भारत-यूरोप आर्थिक संबंधों को नया संस्थागत रूप देने के लिए पीएम ने तीन महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे:

      1. भारत-यूरोप CEO Roundtable: इस मंच का आयोजन साल में एक बार अनिवार्य रूप से किया जाए, जिसमें दोनों तरफ की इंडस्ट्री बॉडीज शामिल हों।
      2. Sector-Specific Working Groups: अलग-अलग उद्योगों के लिए विशेष वर्किंग ग्रुप्स का गठन हो।
      3. India Action Group / India Desk: यूरोपीय व्यापार गोलमेज (ERT) के तहत एक समर्पित ‘इंडिया डेस्क’ बने, जो भारत में मौजूद कंपनियों के विस्तार (Expansion) में मदद करे, नई कंपनियों की एंट्री आसान बनाए और उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान (Proactive Resolution) करे।

​साझा मूल्यों पर टिकी है यह पार्टनरशिप

​संबोधन के समापन पर यह संदेश दिया गया कि भारत और यूरोप की यह जुगलबंदी केवल ठंडे आर्थिक आंकड़ों या व्यापारिक मुनाफे तक सीमित नहीं है। यह लोकतंत्र, विविधता, ट्रस्ट (भरोसे), ट्रांसपेरेंसी (पारदर्शिता), इनोवेशन और इंक्लूजन (समावेशिता) जैसे साझा मूल्यों पर टिकी है।

​वैश्विक तनाव और सप्लाई चेन के संकट के इस दौर में भारत और यूरोप मिलकर दुनिया को स्टेबिलिटी (स्थिरता) और सस्टेनेबिलिटी (सतत विकास) देने वाले सबसे मजबूत स्तंभ बन सकते हैं। गोठनबर्ग से शुरू हुआ यह संवाद आने वाले समय में दोनों क्षेत्रों के औद्योगिक इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिखेगा।

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