जयपुर, गौरव कोचर/भारत–यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) लागू होने के बाद जयपुर से यूनाइटेड किंगडम (यूके) के लिए पहली आभूषण निर्यात खेप को सांगानेर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे स्थित एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। रंगीन रत्नों और हस्तनिर्मित आभूषणों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध जयपुर के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।
इस अवसर पर आयोजित समारोह में अपर आयुक्त सीमा शुल्क नीरज दुबे, अपर आयुक्त सीमा शुल्क सुनीता वर्मा, उप आयुक्त सीमा शुल्क (एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स, जयपुर) जितेन्द्र मीणा, संयुक्त महानिदेशक विदेश व्यापार (DGFT) जयपुर कार्यालय के विदेश व्यापार विकास अधिकारी (FTDO) राम प्रकाश तथा रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) राजस्थान के क्षेत्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र गर्ग उपस्थित रहे।
जयपुर का यह फ्लैग-ऑफ समारोह दिल्ली, मुंबई, सूरत, चेन्नई और कोलकाता सहित देशभर में आयोजित उस राष्ट्रव्यापी पहल का हिस्सा रहा, जिसके तहत भारत–यूके CETA के अंतर्गत पहली बार यूके के लिए आभूषण निर्यात का शुभारंभ किया गया।
इस पहली खेप में जयपुर के प्रमुख निर्यातक द्वारका जेम्स लिमिटेड, गैलेंट ज्वेलरी, विनायक ज्वेल्स इंडिया प्रा. लि. तथा वैभव ग्लोबल लिमिटेड शामिल हैं। लगभग 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की इस खेप में स्वर्ण आभूषण, हीरा जड़ित आभूषण, रजत आभूषण तथा प्लैटिनम आभूषण शामिल किए गए हैं।
CETA से मिलेगा बड़ा लाभ
भारत–यूके CETA के लागू होने के साथ ही भारतीय आभूषण निर्यातकों को यूके बाजार में शून्य सीमा शुल्क (Zero Duty) का लाभ मिलेगा। इससे पहले यूके में भारतीय आभूषणों पर 4 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाया जाता था, जो अब समाप्त हो जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों को लगभग 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर के यूके आभूषण आयात बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और निर्यात, निवेश तथा रोजगार को नई गति मिलने की उम्मीद है।
सीमा शुल्क आयुक्त आर.के. चंदन ने कहा कि भारत–यूके CETA के तहत पहली निर्यात खेप का प्रेषण भारत की निर्यात यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। सीमा शुल्क विभाग तेज एवं सुगम कस्टम क्लीयरेंस तथा प्रभावी निर्यात सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस ऐतिहासिक उपलब्धि से जुड़े सभी निर्यातकों को बधाई देते हुए यूके बाजार में उनकी निरंतर सफलता की कामना की।
तीन वर्षों में 2.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है निर्यात
GJEPC के अध्यक्ष किरीट भंसाली ने कहा कि यह केवल आभूषणों की पहली खेप नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक व्यापार यात्रा के नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस ऐतिहासिक समझौते को सफलतापूर्वक लागू कराने के लिए आभार व्यक्त किया।
उन्होंने बताया कि CETA के तहत आयात शुल्क समाप्त होने से भारतीय निर्यातकों को उल्लेखनीय प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा। परिषद का अनुमान है कि अगले तीन वर्षों में भारत का यूके को रत्न एवं आभूषण निर्यात वर्तमान लगभग 754 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे निर्यातकों, निर्माताओं, एमएसएमई, कारीगरों और डिजाइनरों के लिए नए अवसर सृजित होंगे तथा भारत मूल्यवर्धित आभूषण निर्माण का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
जयपुर बनेगा सबसे बड़ा लाभार्थी
GJEPC राजस्थान के क्षेत्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र गर्ग ने कहा कि जयपुर सदियों से रंगीन रत्नों, हस्तनिर्मित आभूषणों और उत्कृष्ट शिल्पकला के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध रहा है। भारत–यूके CETA इस विरासत को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित आभूषण बाजारों तक नई मजबूती के साथ पहुंचाने का अवसर देगा।
उन्होंने कहा कि शून्य शुल्क बाजार पहुंच मिलने से राजस्थान का रत्न एवं आभूषण उद्योग भारत की नई निर्यात यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जयपुर के निर्माता, कारीगर और निर्यातक इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए तैयार हैं।
रोजगार और एमएसएमई को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत–यूके CETA से राजस्थान के रत्न एवं आभूषण उद्योग को बेहतर बाजार पहुंच, मूल्यवर्धित विनिर्माण, रोजगार सृजन, कौशल विकास तथा एमएसएमई, कारीगरों और निर्यातकों की भागीदारी को मजबूत करने में मदद मिलेगी। रंगीन रत्नों, हीरा जड़ित आभूषणों और हस्तनिर्मित आभूषणों में जयपुर की वैश्विक पहचान इस समझौते का सबसे बड़ा लाभार्थी बनने की क्षमता रखती है।
GJEPC का परिचय
रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) की स्थापना वर्ष 1966 में भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा देश के रत्न एवं आभूषण निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। वर्ष 1998 से परिषद को स्वायत्त संस्था का दर्जा प्राप्त है। वर्तमान में परिषद देशभर के 11 हजार से अधिक सदस्यों का प्रतिनिधित्व करती है।
मुंबई स्थित मुख्यालय के अलावा GJEPC के नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, सूरत और जयपुर में क्षेत्रीय कार्यालय संचालित हैं। परिषद पिछले कई दशकों से देश के सबसे सक्रिय निर्यात संवर्धन संगठनों में शामिल है और निर्यातकों को विभिन्न सेवाएं एवं सुविधाएं उपलब्ध करा रही है।