भारत-मलेशिया समुद्री सहयोग मजबूत: पोर्ट क्लांग से रवाना हुआ नौसेना का शोध पोत ‘आईएनएस सागरध्वनि’

प्रीति बालानी 

कुआलालंपुर / नई दिल्ली, 16 मई 2026

भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक समुद्र विज्ञान अनुसंधान पोत, आईएनएस सागरध्वनि (INS Sagardhwani), रॉयल मलेशियन नौसेना के साथ एक बेहद सफल और रणनीतिक समन्वय कार्यक्रम को पूरा करने के बाद 15 मई 2026 को पोर्ट क्लांग, मलेशिया से आगे के मिशन के लिए रवाना हो गया। इस द्विपक्षीय प्रवास के दौरान दोनों मित्र देशों की नौसेनाओं के बीच पेशेवर, तकनीकी और वैज्ञानिक स्तर पर बेहद सार्थक एवं उच्च स्तरीय बातचीत दर्ज की गई।

​आधुनिक जलविज्ञान और समुद्री अनुसंधान पर गहन मंथन

​मलेशियाई बंदरगाह पर प्रवास के दौरान दोनों नौसेनाओं के विशेषज्ञों और अधिकारियों ने आधुनिक जलवैज्ञानिक (Hydrographic) पद्धतियों, समुद्री पर्यावरण अनुसंधान और समुद्र विज्ञान प्रौद्योगिकियों (Oceanographic Technologies) में हो रही वैश्विक प्रगति पर अपने-अपने दृष्टिकोण और विचार साझा किए।

समन्वय कार्यक्रम के मुख्य बिंदु:

  • तकनीकी दौरा: रॉयल मलेशियन नौसेना के जलवैज्ञानिक विभाग के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आईएनएस सागरध्वनि का दौरा किया। इस दौरान मलेशियाई अधिकारियों को जहाज पर स्थापित उन्नत भारतीय समुद्रवैज्ञानिक प्रणालियों और अत्याधुनिक उपकरणों से परिचित कराया गया।
  • विशेषज्ञ चर्चा (SMEE): दोनों पक्षों के विशेषज्ञ अधिकारियों के बीच ‘विषय वस्तु विशेषज्ञ आदान-प्रदान’ (Subject Matter Expert Exchange – SMEE) सत्र आयोजित किया गया। इसमें डेटा-केंद्रित रखरखाव दृष्टिकोण, प्रवृत्ति मूल्यांकन विधियों, नौवहन सुरक्षा उपकरणों और प्रौद्योगिकी-आधारित निर्णय-सहायता तंत्रों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन तकनीकी चर्चा हुई।

​उच्चायुक्त से भेंट और वैज्ञानिक मिशन पर चर्चा

​इस महत्वपूर्ण प्रवास के दौरान आईएनएस सागरध्वनि के कमांडिंग ऑफिसर ने मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में भारत के उच्चायुक्त से शिष्टाचार भेंट की। इस बैठक के दौरान जहाज के वर्तमान में चल रहे समुद्र विज्ञान मिशन की प्रगति और दोनों देशों के बीच गहरे वैज्ञानिक सहयोग को और अधिक विस्तार देने की रणनीतियों पर विशेष रूप से चर्चा की गई।

​रणनीतिक और क्षेत्रीय सहयोग का नया अध्याय

​आईएनएस सागरध्वनि का यह मलेशिया दौरा भारत और मलेशिया के बीच लगातार गहरे होते द्विपक्षीय और समुद्री संबंधों की दिशा में एक बड़ा कदम है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह सफल प्रवास न केवल दोनों नौसेनाओं के बीच घनिष्ठ व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि हिंद महासागर और दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग, संयुक्त ज्ञान साझा करने और सुरक्षित समुद्री पर्यावरण के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।

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