भारत–मलेशिया व्यापार में नई ऊर्जा — आरतिया और सीआईआईएम मिलकर बनाएंगे संयुक्त कार्य समूह

भारत–मलेशिया व्यापार में नई ऊर्जा — आरतिया और सीआईआईएम मिलकर बनाएंगे संयुक्त कार्य समूह

निवेश, निर्यात और कारोबारी सहयोग के लिए दोनों देशों के उद्योग जगत ने मिलाया हाथ

लोकेंद्र सिंह शेखावत •

जयपुर, 4 नवम्बर। भारत और मलेशिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को नए आयाम देने की दिशा में एक अहम पहल हुई है। अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आरतिया) और कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रियलिस्ट्स इन मलेशिया (सीआईआईएम) ने दोनों देशों के बीच औद्योगिक सहयोग, निवेश और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मिलकर कार्य करने पर सहमति जताई है।

जयपुर में आयोजित बैठक में सीआईआईएम के वाइस चेयरमैन आर. सी. अग्रवाल और आरतिया के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। इस अवसर पर आरतिया के चेयरमैन कमल कंदोई, मुख्य संरक्षक आशीष सर्राफ, स्ट्रेटजी एडवाइजर अजय गुप्ता, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट कैलाश शर्मा, वाइस प्रेसिडेंट रवि गोयल और आयुष जैन उपस्थित रहे।

भारत-मलेशिया व्यापार के आंकड़े और संभावनाएं

बैठक में आर. सी. अग्रवाल ने बताया कि मलेशिया के लिए भारत शीर्ष 10 व्यापारिक देशों में शामिल है। वर्ष 2024–25 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 19.86 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा। इसमें मलेशिया से भारत को 12.56 अरब डॉलर का निर्यात और भारत से 7.30 अरब डॉलर का आयात हुआ।

भारत द्वारा मलेशिया से सबसे अधिक आयात पेट्रोलियम उत्पादों (2.27 अरब डॉलर) और इंजीनियरिंग उत्पादों (1.46 अरब डॉलर) के रहे हैं। अग्रवाल ने कहा कि राजस्थान भौगोलिक रूप से विशाल और संसाधन-समृद्ध राज्य है, जहाँ से कृषि, खनिज और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात की व्यापक संभावनाएँ हैं। वहीं भारत में तांबे की बढ़ती मांग को देखते हुए मलेशिया से इसका आयात बढ़ाया जा सकता है।

राजस्थान में निवेश के व्यापक अवसर

आरतिया चेयरमैन कमल कंदोई और मुख्य संरक्षक आशीष सर्राफ ने बताया कि मलेशियाई कंपनियों के लिए राजस्थान में निवेश के असीम अवसर हैं। उन्होंने कहा —

“राजस्थान का इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरी विकास, सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और कृषि-खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्र विदेशी निवेश के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं। वहीं, राजस्थान के आईटी, स्वास्थ्य और सेवा क्षेत्र के निवेशकों के लिए मलेशिया में निवेश की बड़ी संभावनाएँ मौजूद हैं।”

संयुक्त उद्योग और बढ़ते कारोबारी रिश्ते

स्ट्रेटजी एडवाइजर अजय गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में मलेशिया में 150 से अधिक भारतीय कंपनियां कार्यरत हैं, जिनमें 60 से अधिक संयुक्त उपक्रम हैं। भारत मलेशिया से खाद्य तेल, मैकेनिकल उपकरण, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और खनिजों का आयात करता है। उन्होंने कहा कि पर्यटन, जेम्स एंड ज्वेलरी, और खाद्य उद्योग जैसे क्षेत्र दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर खोल सकते हैं।

संयुक्त कार्य समूह करेगा निवेशकों को सहयोग

बैठक के अंत में यह सहमति बनी कि आरतिया और सीआईआईएम मिलकर एक संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) का गठन करेंगे। यह समूह दोनों देशों के निवेशकों को आवश्यक जानकारी, तकनीकी मार्गदर्शन और नीतिगत सहायता उपलब्ध कराएगा। साथ ही, सीमा शुल्क एवं निवेश प्रक्रियाओं के सरलीकरण के लिए सरकार को सुझाव भी देगा।

यह पहल भारत-मलेशिया के आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सहयोग से राजस्थान और मलेशिया के उद्योग जगत के बीच न केवल व्यापारिक रिश्ते मजबूत होंगे, बल्कि क्षेत्रीय रोजगार और नवाचार को भी नई दिशा मिलेगी।

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