सुनील शर्मा
नई दिल्ली | 23 अप्रैल 2026
कल, 24 अप्रैल 2026 को पूरे देश में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (NPRD) अत्यंत उत्साह के साथ मनाया जाएगा। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले मुख्य समारोह में भारत की लोकतांत्रिक यात्रा के इस ऐतिहासिक पड़ाव का जश्न मनाया जाएगा। यह दिन 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम के लागू होने की याद दिलाता है, जिसने भारत में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा दिया था।
प्रधानमंत्री का संदेश और मुख्य अतिथि
शुक्रवार को विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विशेष संदेश पढ़ा जाएगा। इस संदेश को पंचायती राज मंत्रालय द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यम से देश भर के निर्वाचित प्रतिनिधियों और ग्रामीण स्थानीय निकायों तक पहुँचाया जाएगा।
कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रोफेसर एस. पी. सिंह बघेल मुख्य रूप से उपस्थित रहेंगे। साथ ही, मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस गौरवशाली समारोह का हिस्सा बनेंगे। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा की पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि भी विशेष रूप से आमंत्रित किए गए हैं।
प्रमुख विमोचन और पहल
समारोह के दौरान ग्रामीण विकास और पारदर्शिता को बढ़ावा देने वाली कई महत्वपूर्ण रिपोर्ट और पुस्तकों का विमोचन किया जाएगा:
- पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI)-2.0: पंचायतों की प्रगति का आकलन करने वाली इस रिपोर्ट का दूसरा संस्करण जारी किया जाएगा।
- ‘मेरी पंचायत मेरी धरोहर’: इसके तहत ग्रामीण विरासत पर आधारित तीन सचित्र पुस्तकों का विमोचन होगा:
- त्रिपुरा की ग्रामीण विरासत पर आधारित मोनोग्राफ।
- तिरुपति की ग्रामीण विरासत पर केंद्रित मोनोग्राफ।
- ’उत्तरकाशी: सौम्या काशी: हिमालयी विरासत की आत्मा’ नामक विशेष पुस्तक।
ग्राम स्तर पर उत्सव और ‘विकसित भारत’ का संकल्प
यह दिवस केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहेगा। देश के हर ब्लॉक, जिले और ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन होगा।
सहभागी लोकतंत्र: ग्राम पंचायतों द्वारा ‘ग्राम सभाओं’ का आयोजन किया जाएगा, जो जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दोहराती हैं।
पंचायती राज संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण के ये 33 वर्ष “विकसित भारत” के लक्ष्य को प्राप्त करने में ग्रामीण प्रशासन की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करते हैं। यह उत्सव न केवल पिछली उपलब्धियों को याद करने का अवसर है, बल्कि ग्रामीण भारत को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक नई ऊर्जा भरने का भी माध्यम है।