गौरव कोचर/भारत और भूटान के बीच ऐतिहासिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। हालिया रणनीतिक विकास और उच्च स्तरीय वार्ताओं के बाद दोनों देशों ने आर्थिक आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा और सीमा पार कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में अपने सहयोग को नई गति प्रदान की है। भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (पड़ोसी प्रथम) नीति के तहत भूटान के साथ यह साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता और सतत विकास का एक मजबूत मॉडल बनकर उभर रही है।
सहयोग के प्रमुख स्तंभ और रणनीतिक फोकस
- सीमा पार कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा: भारत और भूटान के बीच व्यापार और आवागमन को सुगम बनाने के लिए रेल और सड़क नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। कोकराझार-गेलेफू और बनारहाट-समत्से रेल लिंक परियोजनाओं पर कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहा है, जिससे दोनों देशों के सीमावर्ती व्यापार को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
- पनबिजली और नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग: पारंपरिक जलविद्युत परियोजनाओं (जैसे मांगदेछु और पुनातसांगछु) के सफल संचालन के साथ-साथ अब दोनों देश सौर और पवन ऊर्जा जैसे गैर-पारंपरिक नवीकरणीय स्रोतों में भी संयुक्त निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं।
- आर्थिक विकास और गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी: भूटान की महत्वाकांक्षी ‘गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी’ (GMC) विशेष प्रशासनिक क्षेत्र परियोजना में भारत एक प्रमुख रणनीतिक और विकासात्मक भागीदार के रूप में सहयोग दे रहा है। यह पहल दक्षिण एशिया में व्यापार, नवाचार और पर्यावरण-अनुकूल निवेश का नया केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।
- डिजिटल और फिनटेक एकीकरण: भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (DPI) के विस्तार के तहत भूटान में रूपे (RuPay) और भीम-यूपीआई (BHIM-UPI) के सफल एकीकरण के बाद अब डिजिटल साक्षरता, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (संयुक्त उपग्रह पहल) में सहयोग को गहरा किया जा रहा है।
रणनीतिक महत्व
सड़क, रेल, व्यापार, ऊर्जा और डिजिटल तकनीकों में हो रहा यह समन्वित विस्तार दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को आपस में मजबूती से जोड़ रहा है। यह रणनीतिक तालमेल न केवल भूटान के आर्थिक परिवर्तन और आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों को बल दे रहा है, बल्कि पूरे उप-क्षेत्र में व्यापारिक सुगमता और सुरक्षा को भी नई मजबूती प्रदान कर रहा है।