जयपुर, 16 जुलाई 2026 /नरेश गुनानी/ भारत और ब्रिटेन के बीच हाल ही में लागू हुए नए व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (India-UK CETA) के सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखने लगे हैं। इसी क्रम में, जयपुर के कनकपुरा स्थित ICD (इनलैंड कंटेनर डिपो) कॉनकॉर (CONCOR) से ब्रिटेन के लिए पहली निर्यात खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह ऐतिहासिक कार्यक्रम हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (EPCH) के विशेष सहयोग से आयोजित किया गया।
इस शुरुआत को जयपुर और राजस्थान के स्थानीय निर्यातकों के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जिससे उन्हें यूरोपीय बाजारों में सीधी और सुगम पहुंच मिलेगी।
निर्यात की गई खेप का विवरण
इस उद्घाटन खेप के तहत जयपुर से कुल 4 कंटेनर्स ब्रिटेन के लिए रवाना किए गए हैं। इन कंटेनरों में भेजे जा रहे भारतीय उत्पादों की कुल कीमत 1,68,395.54 ब्रिटिश पाउंड (GBP) आंकी गई है। इसमें मुख्य रूप से हैंडीक्राफ्ट, दवाइयां (फार्मा) और रत्न एवं आभूषण (ज्वेलरी) शामिल हैं।
कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख अधिकारी एवं निर्यातक
इस महत्वपूर्ण अवसर पर सीमा शुल्क, विदेश व्यापार और निर्यात संवर्धन परिषदों के कई वरिष्ठ अधिकारी तथा व्यापार जगत के प्रतिनिधि मौजूद रहे:
विभागीय अधिकारी:
- शंकरा रमन: असिस्टेंट कमिश्नर, सीमा शुल्क (Customs)
- राम प्रकाश: अधिकारी, विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT)
- राम सी. भगत: असिस्टेंट मैनेजर, कॉनकॉर (CONCOR)
निर्यात संवर्धन परिषदों के प्रतिनिधि:
- गिरीश अग्रवाल: क्षेत्रीय संयोजक, EPCH
- अमित भार्गव: रीजनल ऑफिसर, EPCH
- नितिन खंडेलवाल: रीजनल डायरेक्टर, रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC)
प्रमुख निर्यातक व कारोबारी:
कार्यक्रम में हैंडीक्राफ्ट, ज्वेलरी और फार्मा सेक्टर के कई निर्यातकों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया, जिनमें प्रमुख हैं:
- विशाल चौधरी और सवित्रा चौधरी (मैसर्स परंपरा)
- जे. के. ओसवाल (मैसर्स पॉलीमेडिक्योर लिमिटेड)
- अतुल गोयल (मैसर्स आर्टएशिया)
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से स्थानीय उद्योगों को संजीवनी
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों ने निर्यातकों और व्यापारियों को संबोधित करते हुए भारत सरकार द्वारा दुनिया भर के देशों के साथ किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के दूरगामी फायदों पर प्रकाश डाला।
विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि नए India-UK CETA समझौते के कारण जयपुर और इसके आस-पास के जिलों के कुटीर एवं मध्यम उद्योगों को भारी लाभ होगा। अब यहाँ बनने वाले विश्वप्रसिद्ध हस्तशिल्प उत्पाद, रत्न-आभूषण और दवाइयां ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी व्यापारिक बाधा के और अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बेचे जा सकेंगे, जिससे न केवल निर्यात बढ़ेगा बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।