नई दिल्ली, 04 जून 2026 | सुनील शर्मा
भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) ने महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत और सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी और यूके की विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास मामलों की राज्य सचिव (लेबर पार्टी की सांसद) यवेट कूपर ने आज नई दिल्ली में ‘भारत-ब्रिटेन महत्वपूर्ण खनिज वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला वेधशाला’ (Global Supply Chain Observatory – GSCO) का औपचारिक शुभारंभ किया।
साझेदारी का महत्व और उद्देश्य
जीएससीओ का शुभारंभ दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण खनिजों और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती पर बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए आवश्यक संसाधनों को सुरक्षित करना है:
- स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन (Clean Energy Transition)
- उन्नत विनिर्माण (Advanced Manufacturing)
- इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (Electric Mobility)
- उभरी हुई अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियाँ
केंद्रीय मंत्रियों और गणमान्य व्यक्तियों के वक्तव्य
जी. किशन रेड्डी (केंद्रीय कोयला और खान मंत्री):
“महत्वपूर्ण खनिज आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं की रीढ़ हैं। यह वेधशाला महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला संबंधी जानकारी के लिए भारत की क्षमताओं को मजबूत करेगी। इसके साथ ही, यह साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में सहयोग देगी और राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमएम) के उद्देश्यों को आगे बढ़ाएगी। यह पहल विश्वसनीय साझेदारों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और लचीली मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”
यवेट कूपर (विदेश सचिव, ब्रिटेन):
“सुदृढ़, विविध और टिकाऊ महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं के विकास में भारत-ब्रिटेन का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। खनिजों तक अधिक पहुंच और बेहतर सूचना-साझाकरण दोनों देशों के पारस्परिक हित में है। यह साझेदारी आर्थिक विकास, आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा और संबंधित रणनीतिक उद्योगों में व्यापक सहयोग की नींव रखेगी।”
किन संस्थानों का है संयुक्त प्रयास?
यह वेधशाला मुख्य रूप से तीन प्रमुख संस्थानों की एक संयुक्त पहल है:
- टेक्समिन (TEXMiN): (टीटीआरपी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार)
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT – ISM) धनबाद
- कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (University of Cambridge), यूके
आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के निदेशक और टेक्समिन के शासी बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर सुकुमार मिश्रा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह पहल ‘राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन’ और ‘भारत-यूके प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल’ के तहत एक मील का पत्थर है।
वेधशाला की कार्यप्रणाली और पृष्ठभूमि
कार्यक्रम के दौरान ‘टेक्समिन’ और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने वेधशाला की एक संवादात्मक (Interactive) प्रस्तुति दी।
- डेटा-संचालित मंच: यह मंच वैश्विक स्तर पर खनिजों की आपूर्ति, बाजार की जानकारी, आपूर्ति जोखिमों और व्यवधानों की पहचान करने के लिए डेटा का विश्लेषण करेगा, जिससे नीति निर्माताओं, उद्योगों और शोधकर्ताओं को सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
- पृष्ठभूमि: इस ऐतिहासिक पहल की घोषणा अक्टूबर 2025 में भारत और यूके के प्रधानमंत्रियों की द्विपक्षीय बैठक के दौरान की गई थी। इसके बाद, मार्च 2026 में एक अनुसंधान सहयोग समझौते के माध्यम से इसे औपचारिक रूप दिया गया था।