भारत-पाक सीमा पर अभेद्य हुआ सुरक्षा घेरा: अमित शाह ने भुज में G-7 और G-13 बॉर्डर आउट पोस्ट का किया लोकार्पण, ‘टेरिटोरियल सुरक्षा’ के लिए लॉन्च किया ‘चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड’

नरेश गुनानी

भुज/नई दिल्ली, 29 मई 2026

भारत-पाकिस्तान सीमा पर देश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज गुजरात के भुज में बॉर्डर आउट पोस्ट (BOP) का दौरा किया। अमित शाह ने यहाँ भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित G-7 बॉर्डर आउट पोस्ट पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जांबाज जवानों से सीधा संवाद किया। इसके साथ ही उन्होंने दुर्गम और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में तैयार की गईं G-7 और G-13 बॉर्डर आउट पोस्ट का औपचारिक लोकार्पण भी किया।

​इस महत्वपूर्ण अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, उप-मुख्यमंत्री हर्ष संघवी, केन्द्रीय गृह सचिव, आसूचना ब्यूरो (IB) के निदेशक, सीमा प्रबंधन सचिव और बीएसएफ के महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक व सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

​ इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना हैं नई चौकियाँ, विषम हालात में BSF डटी

​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि बीएसएफ के जवान बेहद विषम जलवायु और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में देश की रक्षा करते हैं। दलदली और रेतीले इलाकों में हंसते चेहरों के साथ जवानों को डटे देखकर गर्व की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा, “जब बीएसएफ के जवान सरहद पर चौबीसों घंटे बिना थके पहरा देते हैं, तो हमें भी थकने का बिल्कुल अधिकार नहीं है।”

​अमित शाह ने बीएसएफ के पराक्रम को रेखांकित करते हुए कहा:

  • फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस: स्थापना से लेकर अब तक बीते 60 वर्षों में बीएसएफ ने देश की दो सबसे कठिन सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी बखूबी निभाई है।
  • -45^\circ\text{C} से +45^\circ\text{C} का साहस: कश्मीर की बर्फीली चोटियों, सुंदरबन के जंगलों, राजस्थान के तपते रेत के टीलों से लेकर कच्छ के दुर्गम रेगिस्तान और सरक्रीक व हरामी नाले की दलदली जमीन तक, जवान हर मौसम में मुस्तैद हैं।
  • सर्वोच्च बलिदान को नमन: देश की संप्रभुता की रक्षा करते हुए अब तक बल के 2000 से अधिक जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है, जिसके कारण आज 140 करोड़ देशवासी चैन की नींद सोते हैं।

​ ‘बॉर्डर सुरक्षा’ से ‘टेरिटोरियल सुरक्षा’: क्या है ‘चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड’?

​गृह मंत्री ने सीमा सुरक्षा की पूरी अवधारणा को बदलते हुए एक नए और बड़े विजन का एलान किया। उन्होंने कहा कि बीएसएफ की स्थापना के 60वें वर्ष में अब सिर्फ ‘बॉर्डर सुरक्षा’ नहीं, बल्कि पूरी ‘टेरिटोरियल सुरक्षा’ (प्रादेशिक सुरक्षा) सुनिश्चित की जाएगी।

चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड का नया मंत्र: आने वाले दिनों में देश की सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए एक विशेष ग्रिड बनाया जा रहा है। इस ‘चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड’ के तहत जनता, सिविल प्रशासन, स्थानीय पुलिस/मिलिट्री और बीएसएफ चारों कड़ियाँ एक साथ मिलकर सुरक्षा का मजबूत चक्रव्यूह तैयार करेंगी।

 

​स्मार्ट बॉर्डर सिक्योरिटी: ड्रोन, रडार और ‘लीक-प्रूफ’ सुरक्षा का ताना-बाना

​अमित शाह ने बताया कि सरकार बजट की चिंता किए बिना अत्याधुनिक तकनीक के सहारे जवानों की सुविधाएं बढ़ा रही है और सीमाओं को अभेद्य बना रही है।

  • अभेद्य हुआ सरक्रीक और हरामी नाला: कभी सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाने वाला यह क्षेत्र अब अत्याधुनिक वॉच टावर्स, कनेक्टिंग रोड्स, मॉडर्न फेंसिंग और ग्राउंड लेवल से ऊपर उठाई गई चौकियों के कारण पूरी तरह सुरक्षित हो चुका है। अगले 2 साल में यह क्षेत्र दुश्मन की बुरी नजर से हमेशा के लिए मुक्त हो जाएगा।
  • लीक-प्रूफ ग्रिड: ‘स्मार्ट बॉर्डर सिक्योरिटी प्रोजेक्ट’ के तहत हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। जहां जमीनी फेंसिंग (बाड़) लगाना नामुमकिन है, वहां ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, रडार, थर्मल इमेजर और तकनीकी फेंसिंग के जरिए ऐसा आधुनिक सुरक्षा तंत्र खड़ा किया जा रहा है कि कोई भी घुसपैठिया सरहद भेदने की हिम्मत न कर सके।

​बंगाल में सरकार बनते ही एक सप्ताह में मिली फेंसिंग की जमीन

​देश के पूर्वी बॉर्डर की सुरक्षा पर बात करते हुए अमित शाह ने एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा ग्रिड में सबसे बड़ी कमी पश्चिम बंगाल बॉर्डर पर अधूरी फेंसिंग थी, क्योंकि भौगोलिक चुनौतियों के अलावा वहां जमीन मिलने में बरसों से गतिरोध बना हुआ था।

​उन्होंने आगे कहा, “हाल ही में बंगाल की जनता के आशीर्वाद से वहां हमारी पार्टी की सरकार बनी और मुख्यमंत्री ने वादे से भी पहले, महज एक सप्ताह के भीतर बॉर्डर फेंसिंग के लिए सैद्धांतिक रूप से जमीन देने का फैसला कर दिया। कुछ हिस्सों में जमीन सौंप भी दी गई है।” बंगाल सीमा पर फेंसिंग का काम पूरा होते ही देश में घुसपैठ पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी। इसके साथ ही, सरकार आने वाले समय में बीएसएफ के कार्यक्षेत्र में और भी नए इलाकों को जोड़ने पर विचार कर रही है।

​ ‘नडाबेट’ सेंटर से प्रेरित हो रही हैं देश की माताएं

​आम जनता और विशेषकर युवा पीढ़ी को बीएसएफ के शौर्य से रूबरू कराने के लिए बनासकांठा (नडाबेट) में सीमा दर्शन केंद्र बनाया गया है। गृह मंत्री ने बताया कि महज पिछले एक महीने में 2.5 लाख से ज्यादा लोग इस केंद्र का दौरा कर चुके हैं।

​वहां आए फीडबैक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सर्वे के दौरान कई माताओं ने लिखा कि यदि उनके बच्चे बड़े होकर बीएसएफ में शामिल होते हैं, तो यह उनके लिए सबसे बड़े गर्व की बात होगी। इस जन-फीडबैक व्यवस्था को अब ऑनलाइन भी कर दिया गया है। अंत में, गृह मंत्री ने पूरे देश की तरफ से बीएसएफ जवानों के अद्वितीय जज्बे और राष्ट्रभक्ति को सलाम किया।

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