गौरव कोचर
नई दिल्ली / टोक्यो, 26 मई 2026
भारत और जापान के बीच कुशल कार्यबल गतिशीलता (Workforce Mobility) और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए टोक्यो में एक उच्च स्तरीय संयुक्त संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक संगोष्ठी का आयोजन जापान स्थित भारतीय दूतावास और जापान की प्रमुख कंपनी ‘आसियान वन कंपनी लिमिटेड’ द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर भारतीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की सचिव सुश्री वंदना गुरनानी ने मुख्य संबोधन देते हुए वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती जनसांख्यिकीय शक्ति को रेखांकित किया।
इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच पारदर्शी, नैतिक और व्यापक अंतर्राष्ट्रीय श्रम गतिशीलता मार्ग तैयार करना तथा जापानी नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रमुखों और शैक्षणिक संस्थानों को एक मंच पर लाना था।
दिग्गजों का जुटाव: द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर बल
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भारत और जापान के कई प्रमुख नीति निर्माताओं और राजनयिकों ने हिस्सा लिया। संगोष्ठी में शामिल होने वाले प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों में शामिल थे:
- सुश्री नगमा मोहम्मद मल्लिक (जापान में भारत की राजदूत)
- श्री यामाशिता (जापान की प्रतिनिधि सभा के सदस्य एवं पूर्व न्याय मंत्री)
- श्री इनो (अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग राज्य मंत्री, जापान)
- श्री नाकामुरा (शिक्षा, संस्कृति, खेल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री, जापान)
- श्री तादाशी माएदा (अध्यक्ष, जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन)
- श्री केंगो ओत्सुका (उप महानिदेशक, विदेश मंत्रालय, जापान)
इसके अतिरिक्त, जापान के प्रधानमंत्री, असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा और आईआईटी गुवाहाटी के निदेशक की ओर से विशेष संदेश प्राप्त हुए। इन संदेशों में भारत-जापान के बीच सक्रिय मानव आदान-प्रदान के लिए एक सुदृढ़ ‘मध्यम से दीर्घकालिक दृष्टिकोण’ (Medium to Long-term Vision) की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
वैश्विक कार्यबल का विश्वसनीय भागीदार बनकर उभर रहा है भारत
मुख्य संबोधन में श्रम एवं रोजगार सचिव सुश्री वंदना गुरनानी ने कहा कि भारत अपनी विशाल जनसांख्यिकीय शक्ति, मजबूत कौशल विकास प्रणाली और बड़े संस्थागत सुधारों के बल पर जापान सहित वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के लिए कुशल मानव संसाधन का सबसे विश्वसनीय स्रोत बन चुका है।
उन्होंने भारत सरकार के अंतर्राष्ट्रीय श्रम गतिशीलता ढांचे (International Labor Mobility Framework) पर विस्तार से प्रकाश डाला, जिसके प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं:
- ई-माइग्रेट प्लेटफॉर्म (e-Migrate Platform): विदेश मंत्रालय द्वारा संचालित, जो प्रवासन प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाता है।
- राष्ट्रीय करियर सेवा (NCS) और मॉडल करियर केंद्र: युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचा।
- कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र: कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, विभिन्न राज्य सरकारों और उच्च शिक्षण संस्थानों के समन्वय से युवाओं को वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना।
इन प्रमुख सेक्टर्स में सहयोग की अपार संभावनाएं
संगोष्ठी में जापान की प्रमुख कंपनियों के लगभग 250 वरिष्ठ अधिकारियों और मानव संसाधन प्रबंधकों ने भाग लिया। जापानी उद्योग जगत ने भारत के कुशल कार्यबल के साथ जुड़ने में गहरी रुचि दिखाई। दोनों पक्षों ने माना कि निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग की प्रबल संभावनाएं हैं:
- विनिर्माण (Manufacturing) एवं वाहन रखरखाव (Automotive Maintenance)
- आईटी, डिजिटल सेवाएं और उभरते हरित अर्थव्यवस्था (Green Economy) क्षेत्र
- स्वास्थ्य सेवा (Caregiving) और आतिथ्य सत्कार (Hospitality)
- निर्माण (Construction) और कृषि (Agriculture)
भविष्य की रूपरेखा: जापानी भाषा और कौशल मानचित्रण पर जोर
सहयोग को और अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए दोनों देशों ने एक ठोस कार्ययोजना (Way Forward) पर चर्चा की:
- संस्थानों का विस्तार: भारत में जापानी भाषा शिक्षण और परीक्षण केंद्रों का व्यापक विस्तार किया जाएगा।
- व्यावसायिक संरेखण (Vocational Alignment): जापानी नियोक्ताओं की मांग और भारतीय कौशल संस्थानों के पाठ्यक्रमों के बीच तालमेल बैठाया जाएगा।
- असम सरकार की ‘फ्लाइट’ (FLIGHT) पहल: संगोष्ठी में असम सरकार की ‘फॉरेन लैंग्वेज इनिशिएटिव फॉर ग्लोबल टैलेंट’ (FLIGHT) की विशेष रूप से सराहना की गई, जो राज्य स्तर पर युवाओं को जापान-उन्मुख रोजगार मार्गों के लिए तैयार कर रही है।
10 वर्षों में 50,000 मानव विनिमय का बड़ा संकल्प
कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित करते हुए आसियान ग्रुप कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्री तोशियाकी निशिकावा ने भारत-जापान के बीच दीर्घकालिक जन-सहयोग (People-to-People Connect) के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने एक बड़ा संकल्प साझा करते हुए घोषणा की कि:
”आसियान ग्रुप भविष्य में कार्यबल सहयोग के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और हम अगले 10 वर्षों में 50,000 लोगों को शामिल करने के लक्ष्य के साथ ‘जापान-भारत मानव विनिमय कार्यक्रम’ (Japan-India Human Exchange Programme) को धरातल पर उतारेंगे।”
इस संगोष्ठी ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में भारत का हुनर और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI), जापान की औद्योगिक आवश्यकताओं को पूरा करने में एक गेम-चेंजर की भूमिका निभाने जा रहे हैं।