राजधानी के चार प्रमुख स्थानों पर 21 से 23 अगस्त तक हुए भव्य कार्यक्रम
‘घर-घर राम, हर घर रामायण’ अभियान के तहत रंगोली ग्रीन्स में 62 परिवारों ने लिया रामचरितमानस पाठ का संकल्प
देशभक्ति गीतों, कविताओं और वैचारिक मंथन से राष्ट्रभक्ति के रंग में सराबोर हुई गुलाबी नगरी
योगेश शर्मा
जयपुर। भारत जागृति संघ जयपुर महानगर की ओर से 21 से 23 अगस्त तक राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में ‘अखंड भारत स्वाधीनता दिवस’ के उपलक्ष्य में चार भव्य एवं प्रेरणादायी कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की गई। भाकरोटा स्थित सेंचुरी एलीट क्लब, जगतपुरा की ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी, महाराणा प्रताप रोड स्थित रंगोली ग्रीन्स तथा निवारू रोड स्थित वर्धमान स्वप्नलोक में आयोजित इन कार्यक्रमों में 500 से अधिक सनातनी बंधुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और राष्ट्र की एकता व अखंडता का संकल्प दोहराया।
भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने का आह्वान
ओजस्वी कविताओं, देशभक्ति गीतों और गंभीर वैचारिक मंथन से सजे इन आयोजनों में हिमाचल प्रदेश से पधारे मुख्य वक्ता डॉ. विवेक ने अखंड भारत के ऐतिहासिक गौरव और अमर बलिदानियों के संघर्ष को रेखांकित किया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को भारत को पुनः विश्वगुरु के पद पर आसीन करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का संकल्प दिलाया।
‘देव भक्ति से बड़ी देशभक्ति’ का संदेश
भारत जागृति संघ के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राज शर्मा ने अपने संबोधन में ‘देव भक्ति से बड़ी देशभक्ति’ का मूल मंत्र देते हुए राष्ट्र सेवा को सर्वोपरि बताया। उन्होंने संघ के महत्वाकांक्षी अभियान ‘घर-घर राम, हर घर रामायण’ का आह्वान करते हुए कहा कि सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और घर-घर में रामचरितमानस के आदर्शों को स्थापित करने से ही एक सशक्त और संगठित समाज का निर्माण संभव है।
रंगोली ग्रीन्स में निकली भव्य शोभायात्रा
आयोजनों का विशेष आकर्षण महाराणा प्रताप रोड स्थित रंगोली ग्रीन्स में देखने को मिला। यहाँ 62 परिवारों ने पूरे विधि-विधान के साथ रामचरितमानस ग्रंथ ग्रहण कर अपने घरों में नियमित पाठ करने का संकल्प लिया। इस पावन अवसर पर बैंड-बाजों, जयघोष और शंखनाद के साथ एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में मातृशक्ति और युवा शामिल हुए।
संघ की महानगर टीम के समर्पण, समन्वय और संगठनात्मक निष्ठा से संपन्न हुई इस तीन दिवसीय कार्यक्रम श्रृंखला ने राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों को राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति के उल्लास से सराबोर कर दिया।