“भारत जहाँ सबसे अच्छा सौदा मिलेगा, वहीं से तेल खरीदेगा” – रूस में भारतीय राजदूत विनय कुमार
मॉस्को/नई दिल्ली | गौरव कोचर| टेलीग्राफ टाइम्स
भारत के रूस में राजदूत विनय कुमार ने कहा है कि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए जहाँ से सबसे अच्छा सौदा मिलेगा, वहीं से तेल खरीदेगा। उन्होंने यह बयान रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS को दिए एक इंटरव्यू में दिया।
कुमार ने साफ़ किया कि नई दिल्ली की प्राथमिकता देश के 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा है, और यह निर्णय पूरी तरह वाणिज्यिक आधार पर लिया जाता है।
ऊर्जा सुरक्षा भारत की पहली ज़रूरत
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। देश की ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल और गैस पर निर्भर करता है।
- भारत प्रतिदिन लगभग 50 लाख बैरल तेल उपभोग करता है।
- घरेलू उत्पादन ज़रूरत का केवल 20-25% ही पूरा करता है।
- शेष तेल विभिन्न देशों से आयात किया जाता है।
ऐसे में “सबसे सस्ता और भरोसेमंद सौदा” भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है।
रूस-भारत ऊर्जा साझेदारी
- रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए, तब भारत ने रियायती दाम पर रूस से कच्चा तेल खरीदना शुरू किया।
- रूस अब भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है।
- इस कदम की आलोचना अमेरिका और यूरोप ने की, लेकिन भारत ने हमेशा कहा कि यह फैसला राष्ट्रीय हित और आर्थिक व्यावहारिकता पर आधारित है।
अमेरिका का दबाव बनाम भारत की नीति
हाल ही में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ़ रूस की तेल अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश का हिस्सा था।
लेकिन भारत ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के बजाय अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।
विशेषज्ञों का मानना है:
- भारत “मल्टी-अलाइनमेंट” की नीति पर चलता है – यानी सभी देशों से संबंध रखते हुए केवल अपने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देना।
- ऊर्जा बाज़ार में भारत की मांग इतनी बड़ी है कि कोई भी देश इसे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता।
- भारत का यह रुख़ भविष्य में वैश्विक तेल कीमतों और भू-राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करता रहेगा।
भारत ने साफ़ कर दिया है कि तेल खरीद राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक और ज़रूरत आधारित मुद्दा है।
जहाँ सबसे अच्छा सौदा मिलेगा – चाहे वह रूस हो, अमेरिका हो, या कोई और देश – भारत वहीं से तेल खरीदेगा, ताकि 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा ज़रूरतें पूरी की जा सकें।