भारत-कोरिया CEPA उन्नयन वार्ता: डिजिटल व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर सहयोग के लिए बनेंगे उप-समूह, नई दिल्ली में 12वां दौर संपन्न

गौरव कोचर 

नई दिल्ली। भारत और कोरिया गणराज्य के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को और मजबूत तथा आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) के उन्नयन (Upgradation) के लिए वार्ताओं का 12वां दौर 25 से 27 मई 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित किया गया।

​इस महत्वपूर्ण वार्ता में दोनों पक्षों ने व्यापारिक साझेदारी को संतुलित और भविष्य-उन्मुख बनाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। साथ ही, डिजिटल व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और रणनीतिक औद्योगिक सहयोग जैसे उभरते क्षेत्रों पर चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए विशेष उप-समूह (Sub-groups) गठित करने का एक बड़ा निर्णय लिया गया।

​शीर्ष नेतृत्व के विजन को गति देने की प्रतिबद्धता

​यह वार्ता दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व द्वारा परिकल्पित “भविष्योन्मुखी सहभागिता” को धरातल पर उतारने का प्रयास है। हाल ही में कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति के भारत दौरे के दौरान, 20 अप्रैल 2026 को एक संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस घोषणा के अनुरूप, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और कोरियाई व्यापार मंत्री श्री यो हान-कू ने CEPA उन्नयन वार्ताओं में तेजी लाने की प्रतिबद्धता जताई थी, जिसे इस 12वें दौर में आगे बढ़ाया गया।

​इस दौर की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (वाणिज्य विभाग) की संयुक्त सचिव सुश्री कपिल चौधरी और कोरिया गणराज्य की ओर से व्यापार, उद्योग एवं ऊर्जा मंत्रालय में व्यापार समझौता नीति के महानिदेशक श्री पार्क ग्यून-ओह ने की।

​व्यापार घाटे को कम करने पर बनी सहमति

​वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर खुलकर चर्चा की। भारतीय पक्ष ने द्विपक्षीय व्यापार घाटे का मुद्दा उठाया, जो वर्ष 2010 में ‘भारत-कोरिया CEPA’ के लागू होने के बाद से लगातार काफी बढ़ गया है। कोरियाई पक्ष ने इस द्विपक्षीय व्यापार घाटे को स्वीकार किया और दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि इस असंतुलन को समग्र CEPA ढांचे के भीतर ही रचनात्मक तरीके से हल किया जाएगा।

​इन प्रमुख क्षेत्रों पर हुआ विस्तृत मंथन

​तीन दिनों तक चली इस वार्ता में द्विपक्षीय व्यापार से जुड़े कई महत्वपूर्ण नीतिगत और तकनीकी पहलुओं पर गहन समीक्षा की गई, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • वस्तुओं में व्यापार (TIG): बाजार पहुंच और टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा।
  • सेवाओं में व्यापार (TIS): सेवा क्षेत्र में दोनों देशों के पेशेवरों और कंपनियों के लिए अवसरों का विस्तार।
  • मूल के नियम (RoO) और मूल प्रक्रियाएं (OP): व्यापार को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए नियमों का सरलीकरण।
  • निवेश तथा स्वच्छता एवं पादप-स्वच्छता (SPS) मानक: कृषि और खाद्य उत्पादों के व्यापार में गुणवत्ता मानकों और निवेश सुरक्षा पर विमर्श।

​नए उप-समूहों का गठन: भविष्य के व्यापार की नींव

​बदलते वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए दोनों देशों ने पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर नए जमाने की आर्थिक जरूरतों पर ध्यान केंद्रित किया है। इसके तहत निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग का दायरा बढ़ाने के लिए उप-समूह गठित करने का निर्णय लिया गया है:

    1. डिजिटल व्यापार (Digital Trade): ई-कॉमर्स और डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग।
    2. आपूर्ति श्रृंखला सहयोग (Supply Chain Cooperation): वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों से बचने और एक-दूसरे पर निर्भरता को मजबूत करना।
    3. रणनीतिक औद्योगिक सहयोग (Strategic Industrial Cooperation): उच्च तकनीक और रणनीतिक उद्योगों में संयुक्त सहभागिता।

समय-सीमा के भीतर लक्ष्य हासिल करने का संकल्प:

दोनों देशों ने इस बात को दोहराया कि CEPA उन्नयन वार्ता को एक निश्चित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसा आधुनिक, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौता हासिल करना है, जो दोनों देशों के साझा विकास और व्यापारिक हितों की रक्षा कर सके।

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