भारत-केन्या आर्थिक संबंधों में नया उछाल: द्विपक्षीय व्यापार $4.31 अरब पहुँचा, स्थानीय मुद्रा में लेनदेन पर बनी सहमति

गौरव कोचर 

नैरोबी/नई दिल्ली: भारत और केन्या के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी एक नए युग में प्रवेश कर रही है। नैरोबी में 27-28 अप्रैल, 2026 को आयोजित भारत-केन्या संयुक्त व्यापार समिति (JTC) के 10वें सत्र में दोनों देशों ने व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया।

​इस महत्वपूर्ण बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और केन्या की व्यापार प्रधान सचिव रेजिना अकोटा ओम्बम ने की।

​व्यापार में 25% की रिकॉर्ड वृद्धि

​बैठक के दौरान प्रस्तुत आंकड़े दोनों देशों के मजबूत होते आर्थिक रिश्तों की तस्दीक करते हैं।

  • कुल व्यापार: वर्ष 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 4.31 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
  • विकास दर: पिछले वर्ष (3.45 अरब डॉलर) के मुकाबले इसमें 24.91% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई है।
  • प्रमुख क्षेत्र: इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र व्यापार विविधीकरण के मुख्य केंद्र रहे।

​प्रमुख समझौते और रणनीतिक पहल

​व्यापार को सुगम बनाने के लिए बैठक में कई महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) पर मुहर लगाई गई:

  1. सीमा शुल्क सरलीकरण: केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) और केन्या राजस्व प्राधिकरण (KRA) के बीच सीमा शुल्क सूचनाओं के डिजिटल आदान-प्रदान के लिए समझौता हुआ।
  2. मानकीकरण: भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) और केन्या मानक ब्यूरो (KEBS) के बीच सहयोग को बढ़ाने पर सहमति बनी।
  3. B2B सहयोग: भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और भारत-केन्या वाणिज्य एवं उद्योग चैंबर ने निवेश बढ़ाने के लिए हाथ मिलाया।

​स्थानीय मुद्रा में व्यापार और डिजिटल क्रांति

​एक ऐतिहासिक कदम के रूप में, दोनों देशों ने स्थानीय मुद्राओं (रुपया और शिलिंग) में व्यापार निपटान की संभावनाओं पर चर्चा की।

  • ​केन्याई बैंकों ने भारतीय बैंकों के साथ विशेष रुपी वोस्त्रो खाते (SRVA) खोले हैं।
  • ​भारत ने केन्या को अपनी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) जैसे UPI और ‘भारत कनेक्ट’ को अपनाने में सहयोग की पेशकश की है, जिससे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा।

​बुनियादी ढांचा और भविष्य के क्षेत्र

  • रेलवे और जहाज निर्माण: भारत ने केन्या के ‘मानक गेज रेलवे’ के लिए व्यवहार्यता अध्ययन और रोलिंग स्टॉक की आपूर्ति में सहायता का प्रस्ताव दिया। भारतीय शिपयार्डों के साथ जहाज निर्माण में भी सहयोग की संभावना खोजी गई।
  • नवीकरणीय ऊर्जा: केन्या ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) में शामिल होने के अपने निर्णय की पुष्टि की है। भारत वहां सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं में तकनीकी सहायता देगा।
  • स्वास्थ्य एवं शिक्षा: भारत सस्ती जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति जारी रखेगा। साथ ही ‘स्टडी इन इंडिया’ कार्यक्रम और ITEC के माध्यम से केन्याई छात्रों और पेशेवरों का कौशल विकास किया जाएगा।

​संयुक्त व्यापार मंच का आयोजन

​जेटीसी के साथ-साथ भारत-केन्या संयुक्त व्यापार मंच का भी आयोजन हुआ। इसमें CII और केन्या राष्ट्रीय वाणिज्य एवं उद्योग चैंबर (KNCCI) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने स्थानीय भारतीय व्यापार समुदाय के साथ संवाद कर केन्या में व्यापारिक अनुभवों और निवेश के अवसरों पर चर्चा की।

​दोनों पक्षों ने इस बात की पुष्टि की कि भारत और केन्या की यह साझेदारी न केवल द्विपक्षीय है, बल्कि यह दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो आने वाले समय में और अधिक संतुलित और भविष्योन्मुखी होगी।

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