नई दिल्ली/उलानबटोर: गौरव कोचर
भारत और मंगोलिया के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को एक नया आयाम देते हुए, भारतीय वायुसेना (IAF) ने भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को सुरक्षित रूप से मंगोलिया की राजधानी उलानबटोर पहुंचा दिया है। भारतीय वायुसेना के रणनीतिक एयरलिफ्ट विमान IL-76 ‘गजराज’ ने इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

रात भर की उड़ान के बाद मंगोलिया में लैंडिंग
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, भगवान बुद्ध के इन अत्यंत पवित्र अवशेषों को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर ‘गजराज’ विमान ने रवाना किया था। रात भर की लंबी और निर्बाध उड़ान के बाद, विमान भारतीय समयानुसार (IST) सुबह 11:25 बजे मंगोलिया की धरती पर सुरक्षित रूप से उतरा। वहाँ अवशेषों की अगवानी बेहद आदर-सत्कार और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ की गई।
मिशन का मुख्य उद्देश्य: वैश्विक सांस्कृतिक पहुंच और रणनीतिक सामर्थ्य
यह मिशन केवल एक परिवहन अभियान नहीं था, बल्कि इसके गहरे कूटनीतिक और आध्यात्मिक निहितार्थ हैं:
- सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती: यह विशेष मिशन मित्र देशों के साथ भारत के गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को और अधिक मजबूत करने के भारत सरकार के प्रयासों का एक हिस्सा है। मंगोलिया के साथ भारत के संबंध बौद्ध धर्म के साझा इतिहास से जुड़े हुए हैं।
- रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन: इस एयरलिफ्ट ने एक बार फिर भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी के रणनीतिक अभियानों को अंजाम देने की अचूक क्षमता को साबित किया है।
- सॉफ्ट पावर (Soft Power) का विस्तार: यह मिशन दिखाता है कि कैसे भारतीय रक्षा बल देश के राष्ट्रीय उद्देश्यों का समर्थन करने और वैश्विक स्तर पर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ (सांस्कृतिक पहुंच) को बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
बौद्ध कूटनीति में एक नया अध्याय
विशेषज्ञों का मानना है कि भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को मंगोलिया भेजे जाने का यह कदम दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में मील का पत्थर साबित होगा। भारत हमेशा से बौद्ध धर्म की जन्मस्थली के रूप में दुनिया भर के बौद्ध देशों के साथ ‘लुक ईस्ट’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीतियों के तहत अपने संबंधों को प्रगाढ़ करता रहा है। मंगोलिया में इन अवशेषों के पहुंचने से वहाँ के नागरिकों और बौद्ध अनुयायियों में भारी उत्साह और श्रद्धा का माहौल है।
भारतीय वायुसेना का संदेश:
“यह एयरलिफ्ट न केवल वायुसेना की सामरिक क्षमता को प्रदर्शित करता है, बल्कि यह हमारे देश की उस प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है, जिसके तहत हम अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के जरिए वैश्विक शांति और भाईचारे का संदेश प्रसारित करते हैं।”
मंगोलिया में इन पवित्र अवशेषों को आम जनता और श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ एक विशेष समारोह के तहत स्थापित किया जाएगा, जिसमें दोनों देशों के कई वरिष्ठ नागरिक और धार्मिक प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।