सुनील शर्मा
नई दिल्ली | 06 मई 2026
भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाते हुए इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) को मजबूत करने के लिए 15.2 मिलियन यूरो (लगभग 169 करोड़ रुपये) की एक संयुक्त पहल की घोषणा की है। यह कदम भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) के कार्य समूह-2 के तहत उठाया गया है।
महत्वपूर्ण कच्चे माल की सुरक्षा पर जोर
5 मई 2026 को घोषित इस पहल का मुख्य उद्देश्य लिथियम, ग्रेफाइट और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से दोनों क्षेत्र वैश्विक स्तर पर ‘चक्रीय अर्थव्यवस्था’ (Circular Economy) की ओर बदलाव को गति देना चाहते हैं। इस परियोजना को यूरोपीय संघ के ‘होराइजन यूरोप कार्यक्रम’ और भारत के भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) द्वारा संयुक्त रूप से वित्त पोषित किया जाएगा।
प्रमुख लक्ष्य और विशेषताएं
- प्रस्ताव की अंतिम तिथि: शोधकर्ताओं और उद्योगों के लिए प्रस्ताव जमा करने की समय सीमा 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।
- संयुक्त पायलट लाइन: इस पहल के तहत भारत में एक संयुक्त पायलट लाइन स्थापित की जाएगी, जो औद्योगिक स्तर पर नई तकनीकों के सत्यापन और तैनाती में मदद करेगी।
- तकनीकी फोकस: इसमें उच्च दक्षता वाली सामग्री पुनर्प्राप्ति, सुरक्षित डिजिटल संग्रह प्रणाली और मिश्रित रसायन प्रबंधन जैसी उन्नत तकनीकों पर काम किया जाएगा।
- समावेशी मॉडल: यह कार्यक्रम अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक प्रणाली में एकीकृत करने और बैटरी के ‘दूसरे जीवन’ (Second-life applications) के लिए सुरक्षा मानक तय करने पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।
नेताओं के विचार
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने इसे एक महत्वपूर्ण मोड़ बताते हुए कहा:
”भारत के तेजी से बढ़ते EV बाजार के लिए एक मजबूत घरेलू रीसाइक्लिंग प्रणाली संसाधन सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं के लिए अनिवार्य है।”
भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फ़िन ने कहा कि बैटरियां हरित परिवर्तन के केंद्र में हैं। उनका लक्ष्य नवाचारों को प्रयोगशाला से निकालकर वास्तविक दुनिया में लागू करना है, जिससे खनिज सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
वहीं, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के वैज्ञानिक सचिव डॉ. परविंदर मैनी और यूरोपीय आयोग के महानिदेशक मार्क लेमैत्रे ने इस बात पर जोर दिया कि यह सहयोग एक सुदृढ़ अंतर-महाद्वीपीय मूल्य श्रृंखला का निर्माण करेगा, जिससे रणनीतिक सामग्रियां दोनों अर्थव्यवस्थाओं के भीतर सुरक्षित रहेंगी।