सुनील शर्मा
नई दिल्ली/टोक्यो, 05 मई 2026। भारत और जापान ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को एक नई ऊँचाई प्रदान करते हुए द्विपक्षीय सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने का संकल्प लिया है। संयुक्त समिति की हालिया बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार, डिजिटल तकनीक और मानव संसाधन विकास पर विस्तृत चर्चा की।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने बैठक के सफल समापन पर विश्वास व्यक्त किया कि यह विचार-विमर्श भारत-जापान स्वास्थ्य साझेदारी को नई गति प्रदान करेगा।

चर्चा के प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्र
बैठक के दौरान चार मुख्य स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जो दोनों देशों की स्वास्थ्य प्रणालियों को अधिक सामर्थ्यवान और समावेशी बनाएंगे:
1. गैर-संचारी रोगों (NCD) पर प्रहार
- भारत का दृष्टिकोण: भारतीय प्रतिनिधियों ने सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के अनुरूप कैंसर, मधुमेह और हृदय रोगों जैसे गैर-संचारी रोगों के बढ़ते प्रसार पर चिंता जताई। भारत ने इन बीमारियों की जांच, निरंतर देखभाल और व्यापक स्वास्थ्य संवर्धन की रूपरेखा प्रस्तुत की।
- जापान का सहयोग: जापानी प्रतिनिधियों ने कैंसर की पहचान के लिए तकनीकी सहयोग, शीघ्र निदान और संस्थागत क्षमता विकास के माध्यम से उपचार प्रणालियों को मजबूत करने वाली अपनी परियोजनाओं के बारे में जानकारी साझा की।
2. मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और चिकित्सा उत्पादों तक पहुंच
- घरेलू विनिर्माण: भारत ने दवा और चिकित्सा उपकरण क्षेत्रों में अपनी वैश्विक क्षमता का उल्लेख करते हुए घरेलू विनिर्माण को सशक्त बनाने और आयात पर निर्भरता कम करने की अपनी नीति स्पष्ट की।
- सार्वजनिक-निजी मॉडल: जापान ने चिकित्सा उत्पादों की सस्ती उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अपने सफल ‘सार्वजनिक-निजी सहयोग मॉडल’ को साझा किया, जो तकनीक के उपयोग को सुगम बनाता है।
3. डिजिटल स्वास्थ्य और नवाचार
- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन: भारत ने अपने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के विजन को प्रस्तुत किया, जो सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य परिवेश सुनिश्चित करता है।
- एआई और डेटा: जापान ने एआई-सक्षम चिकित्सा प्रौद्योगिकियों, प्रणालियों की अंतर-संचालनीयता और चिकित्सा अनुसंधान में डिजिटल प्लेटफार्मों के एकीकरण के अपने अनुभव साझा किए।
4. मानव संसाधन विकास और कौशल आदान-प्रदान
- दोनों देशों ने चिकित्सा क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान और कुशल कार्यबल के आदान-प्रदान पर सहमति व्यक्त की। भारत ने अपनी नियामक प्रणाली और संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्वास्थ्य सेवा कर्मियों के मार्ग प्रशस्त करने पर बल दिया।
साझा प्रतिबद्धता और भविष्य का रोडमैप
स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने अपने संबोधन में दोहराया कि भारत आपसी विचारों को नागरिकों के लिए सार्थक परिणामों में बदलने के लिए जापान के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह चर्चाएँ समावेशी स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए एक स्पष्ट दिशा निर्धारित करती हैं।
वहीं, जापान की प्रतिनिधि सुश्री ओनोदा ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत के साथ विशेष रणनीतिक संबंधों को और गहरा करने का जापान का संकल्प दोहराया। बैठक का समापन एक सकारात्मक माहौल में हुआ, जिसमें दोनों पक्षों ने बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साझा लक्ष्य की दिशा में निरंतर काम करने की आशा व्यक्त की।