नई दिल्ली / शिमला / पिथौरागढ़/ गौरव कोचर
भारत और चीन के बीच हिमालयी सीमा पर छह साल से बंद पड़ा पारंपरिक व्यापार आखिरकार शनिवार को दोबारा बहाल हो गया। कोविड-19 महामारी और 2020 में गलवान घाटी में हुए सैन्य गतिरोध के बाद से बंद पड़े उत्तराखंड के लिपुलेख (Lipulekh Pass) और हिमाचल प्रदेश के शिपकी ला (Shipki La Pass) दरों से व्यापारिक गतिविधियों की शुरुआत हो गई है।
दोनों देशों के बीच सीमा पर विश्वास बहाली (Trust Building) और द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में इसे एक बड़ा रणनीतिक और आर्थिक कदम माना जा रहा है।
Key Highlights (प्रमुख बिंदु)
- 6 साल का लंबा इंतजार खत्म: वर्ष 2020 में महामारी और सीमा तनाव के कारण बंद हुआ व्यापार आधिकारिक रूप से फिर शुरू हुआ।
- दो प्रमुख ट्रेड रूट सक्रिय:
- लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड): पिथौरागढ़ जिले में स्थित यह मार्ग तिब्बत के तकलाकोट से जुड़ता है।
- शिपकी ला (हिमाचल प्रदेश): किन्नौर जिले में स्थित यह दर्रा चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (TAR) को भारत से जोड़ता है।
- स्थानीय कारोबारियों में खुशी: सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय और स्थानीय व्यापारियों की आजीविका सीधे तौर पर इस व्यापार से जुड़ी हुई है।
किन वस्तुओं का होगा आयात-निर्यात?
भारत और चीन के बीच इस सीमा व्यापार के तहत चुनिंदा पारंपरिक वस्तुओं के लेन-देन की अनुमति होती है:
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भारत से निर्यात (Export from India) |
चीन से आयात (Import from China) |
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हस्तशिल्प और कपड़े: पश्मीना, ऊनी वस्त्र, कालीन |
कच्चा माल: कच्चा रेशम (Raw Silk), याक की पूंछ |
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दैनिक उपयोग का सामान: गुड़, मिश्री, मसाले, चाय |
धार्मिक व सांस्कृतिक: माजा (बर्तन), चिलगोजा, जड़ी-बूटियां |
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अन्य: बर्तन और स्थानीय हस्त निर्मित उत्पाद |
पारंपरिक सामान: ऊन, चीनी मिट्टी के बर्तन |
स्थानीय अर्थव्यवस्था और संबंधों पर प्रभाव
“व्यापार की बहाली सिर्फ आर्थिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक जीवन और सुरक्षा विश्वास को मजबूत करने के लिहाज से भी बेहद अहम है।”
- आजीविका को संबल: किन्नौर (हिमाचल) और धारचूला (उत्तराखंड) के दर्जनों गांवों के स्थानीय व्यापारी लंबे समय से इसे शुरू करने की मांग कर रहे थे। व्यापार बंद होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा था।
- कूटनीतिक प्रगति: गलवान गतिरोध के बाद दोनों देशों के बीच डिसइंगेजमेंट (सैन्य वापसी) प्रक्रिया पूरी होने और कूटनीतिक वार्ताओं के सफल दौर के बाद यह सकारात्मक कदम सामने आया है।
आगे की राह
दोनों देशों के अधिकारियों और सीमा शुल्क (Customs) विभागों ने चेक पोस्टों पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं। सुरक्षा बल (ITBP) और स्थानीय प्रशासन व्यापार पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं ताकि सुचारू रूप से व्यापारिक पास जारी किए जा सकें और बिना किसी बाधा के ट्रेडिंग प्रक्रिया संचालित हो सके।