नई दिल्ली/ गौरव कोचर/भारतीय वित्तीय बाजार के लिए जुलाई 2026 की शुरुआत बेहद शानदार और सकारात्मक रही है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का भरोसा एक बार फिर भारतीय अर्थव्यवस्था पर मजबूत होता दिख रहा है। मार्च से मई के महीनों में बाजार से भारी रकम निकालने के बाद, अब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में जोरदार वापसी कर रहे हैं। जुलाई के शुरुआती 10 दिनों में ही FPIs ने भारतीय बाजार में 2.59 बिलियन डॉलर (लगभग 24,662 करोड़ रुपये) का बड़ा निवेश किया है।
इक्विटी मार्केट में निवेशकों का सबसे ज्यादा रुझान
विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा भरोसा भारतीय शेयर बाजार (इक्विटी) पर जताया है। कुल 2.59 बिलियन डॉलर के निवेश में से 1.6 बिलियन डॉलर का इनफ्लो अकेले इक्विटी सेगमेंट में हुआ है। यह इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर उतार-चढ़ाव के बावजूद विदेशी निवेशकों को भारतीय कंपनियों के प्रदर्शन और देश की आर्थिक वृद्धि दर पर पूरा भरोसा है।
मार्च-मई की भारी बिकवाली के बाद पलटा रुख
यह वापसी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे ठीक पहले के महीनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर फंड निकाला था। आइए नजर डालते हैं पिछले कुछ महीनों के ट्रेंड पर:
- मार्च से मई (भारी निकासी): इन तीन महीनों के दौरान FPIs ने भारतीय बाजार से 24 बिलियन डॉलर से ज्यादा की भारी-भरकम राशि निकाली थी।
- मार्च का रिकॉर्ड: मार्च महीना भारतीय बाजार के लिए सबसे मुश्किल रहा, जब विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 13.6 बिलियन डॉलर की शुद्ध निकासी (Net Outflow) की।
- जून में सुधार के संकेत: जून महीने में बाजार को थोड़ी राहत मिली और विदेशी निवेशकों का रुख बदला। इस दौरान 531 मिलियन डॉलर का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया, जिसने जुलाई की इस बड़ी रिकवरी का आधार तैयार किया।
क्या हैं इस वापसी के मायने?
विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के शुरुआती 10 दिनों में आया यह 24,662 करोड़ रुपये का निवेश भारतीय बाजार के लिए एक ‘बूस्टर डोज’ की तरह है। मार्च-मई में जहां वैश्विक अनिश्चितताओं और अन्य कारणों से विदेशी फंड्स बाहर जा रहे थे, वहीं अब भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी तत्वों (Fundamentals) को देखते हुए निवेशकों ने दोबारा भारत का रुख किया है। यदि निवेश की यही रफ्तार जारी रही, तो जुलाई का महीना घरेलू शेयर बाजार के लिए नए रिकॉर्ड बना सकता है।