जोधपुर/नरेश गुनानी/भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), नई दिल्ली ने अपना 98वां स्थापना दिवस बेहद उत्साह के साथ मनाया। इस भव्य कार्यक्रम का सीधा प्रसारण केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी), जोधपुर में भी देखा गया, जहाँ काजरी के निदेशक, वैज्ञानिक, अधिकारी और कर्मचारी ऑनलाइन माध्यम से इस ऐतिहासिक उत्सव का हिस्सा बने।
इस गरिमामयी कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की।
केंद्रीय मंत्रियों और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
समारोह में देश की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाले कई प्रमुख नेता और नीति निर्माता शामिल हुए। कार्यक्रम में राजीव रंजन सिंह (केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री), रामनाथ ठाकुर (केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री), भागीरथ चौधरी (केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री), और प्रो. एस पी एस बघेल (केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री) उपस्थित रहे। इनके अलावा नीति आयोग के सदस्य प्रो. के वि राजू, डेअर (DARE) के सचिव एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम एल जाट सहित परिषद के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
मुख्य बिंदु: कृषि विकास के लिए नई रणनीतियाँ
कृषि मंत्रालय और वैज्ञानिकों ने मिलकर देश के किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण संकल्प लिए:
- राज्यवार कृषि रोडमैप: देश के विभिन्न हिस्सों की कृषि-जलवायु (Agro-climatic) परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक राज्य के लिए एक विशेष कृषि रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
- 100 जलवायु स्मार्ट ग्राम: बदलते मौसम और पर्यावरण की चुनौतियों से निपटने के लिए देश भर में 100 ‘जलवायु स्मार्ट ग्राम’ (Climate Smart Villages) विकसित करने का बड़ा संकल्प लिया गया है।
- मांग आधारित अनुसंधान: प्रधानमंत्री के विजन को रेखांकित करते हुए जोर दिया गया कि वैज्ञानिकों का शोध किसानों और बाजार की वास्तविक मांग पर आधारित होना चाहिए।
- तिलहन और दलहन में आत्मनिर्भरता: देश को दालों और तेल उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनुसंधान को और तेज करने का आह्वान किया गया।
तकनीक को किसानों के दरवाजे तक पहुँचाने पर जोर
कार्यक्रम के दौरान राजीव रंजन सिंह ने कहा कि वैज्ञानिकों के अनुसंधान का असली लाभ तभी है जब इसे कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के नेटवर्क के जरिए सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाया जाए। वहीं भागीरथ चौधरी ने मिट्टी के स्वास्थ्य (मृदा स्वास्थ्य) को बचाने और प्राकृतिक खेती को अपनाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जब तक देश का किसान आत्मनिर्भर नहीं बनेगा, तब तक भारत आत्मनिर्भर नहीं बन सकता।
नई किस्मों की सौगात और औद्योगिक समझौते
परिषद के महानिदेशक डॉ. एम एल जाट ने आईसीएआर की हालिया उपलब्धियों और भविष्य की चुनौतियों पर एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। स्थापना दिवस के इस खास मौके पर कृषि क्षेत्र को कई नई तकनीकें और फसलें समर्पित की गईं:
- फसल और बागवानी की नई किस्में: फसल विज्ञान की 38 और बागवानी की 5 नई उन्नत किस्में देश को समर्पित की गईं।
- नई प्रौद्योगिकियाँ: फसल विज्ञान की 3 और बागवानी की 3 नई कृषि तकनीकों (प्रौद्योगिकियों) का लोकार्पण किया गया।
- साहित्य और एमओयू: इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण कृषि पत्रिकाओं और पुस्तकों का विमोचन हुआ, साथ ही कृषि तकनीक के व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न औद्योगिक साझेदारों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए।