भामाशाहों के सहयोग से बर में पशु चिकित्सालय भवन का भव्य लोकार्पण: कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत और अविनाश गहलोत ने दी आधुनिक चिकित्सा की सौगात
| नरेश गुनानी
बर (पाली)/जयपुर। राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और पशुपालकों को उनके द्वार पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में गुरुवार को पाली जिले के बर कस्बे में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित हुआ। यहाँ भामाशाहों के उदार सहयोग से नवनिर्मित राजकीय पशु चिकित्सालय भवन का भव्य लोकार्पण कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत एवं पशुपालन, डेयरी व गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत के सानिध्य में संपन्न हुआ। दोनों मंत्रियों ने संयुक्त रूप से फीता काटकर इस आधुनिक चिकित्सा सुविधा का उद्घाटन किया।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है पशुपालन: अविनाश गहलोत
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि राजस्थान के लाखों परिवारों की आजीविका सीधे तौर पर पशुधन पर टिकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बर में इस नए भवन के निर्माण से अब स्थानीय पशुपालकों को अपने बीमार पशुओं के इलाज के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में भटकना नहीं पड़ेगा।
गहलोत ने विशेष रूप से क्षेत्र के भामाशाहों की सराहना करते हुए कहा, “भामाशाहों की उदार सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व के कारण ही यह भवन आज मूर्त रूप ले पाया है। बिना किसी स्वार्थ के जनहित को प्राथमिकता देना प्रेरणादायक है। यह भवन बर गांव के पशुपालकों के विश्वास और सेवा का केंद्र बनेगा।” उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि पशुओं के लिए गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित की जाएं।
पशुपालकों के द्वार तक पहुँची चिकित्सा: जोराराम कुमावत
पशुपालन, डेयरी एवं गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने सरकार की उपलब्धियों को साझा करते हुए कहा कि राज्य सरकार पशुधन संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रदेश की पशु चिकित्सा सेवाओं में आए क्रांतिकारी बदलावों का विवरण दिया:
- 1962 हेल्पलाइन: पशुपालक घर बैठे केवल एक कॉल (1962) के माध्यम से एम्बुलेंस और डॉक्टर की सुविधा ले सकते हैं।
- 536 मोबाइल वेटरनरी यूनिट: प्रदेशभर में 536 मोबाइल वेटरनरी वाहन संचालित हैं जो गांव-गांव जाकर पशुओं का उपचार कर रहे हैं।
- गौशालाओं का विकास: राजस्थान में 100 से अधिक गो-केयर सेंटर स्थापित किए गए हैं और 300 से अधिक गौशालाओं का स्तर सुधारा गया है।
- निःशुल्क दवा योजना: गौशालाओं और चिकित्सालयों में दवाइयां पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध हैं और स्टॉक की कोई कमी नहीं है।
जनसहयोग की अनूठी मिसाल
बर में नवनिर्मित यह पशु चिकित्सालय जनसहयोग और सरकारी समन्वय की अनूठी मिसाल है। कार्यक्रम के दौरान भामाशाहों का आभार व्यक्त किया गया और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, पशुपालक और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रमुख बिंदु:
- उद्देश्य: पशुओं को समय पर आधुनिक उपचार प्रदान करना।
- सहयोग: स्थानीय भामाशाहों द्वारा वित्तीय एवं ढांचागत योगदान।
- सुविधा: आसपास के दर्जनों गांवों के पशुपालकों को सीधा लाभ।

