भव्य कलश यात्रा के साथ न्यू सांगानेर रोड पर त्रिदिवसीय ‘मीरा चरित्र कथा’ का भव्य शुभारंभ

योगेश शर्मा 

जयपुर। श्याम नगर मेट्रो स्टेशन के पास, न्यू सांगानेर रोड स्थित प्रसिद्ध सकेतेश्वर महादेव मंदिर में त्रिदिवसीय मीरा चरित्र कथा का धार्मिक उत्साह और उमंग के साथ भव्य शुभारंभ हुआ। 18 मई से शुरू हुई यह कथा 20 मई तक प्रतिदिन दोपहर 1:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक आयोजित की जाएगी। कथा के पहले दिन आस्था का अनूठा जनसैलाब देखने को मिला।

​501 तुलसी पौधों के साथ निकली अनूठी कलश यात्रा

​कथा के प्रारंभ से पूर्व एक विशाल एवं भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इस यात्रा की खास बात यह रही कि इसमें शामिल 501 महिलाओं ने अपने सिर पर कलश के साथ तुलसी का पौधा धारण कर रखा था।

  • सजीव झांकियां: बैंड-बाजे की मधुर धुनों के बीच रथ पर विराजमान राधा-गोविंद और मीराबाई की अलौकिक सजीव झांकी ने सभी का मन मोह लिया।
  • जगह-जगह स्वागत: कलश यात्रा के मार्ग में भक्तों द्वारा जगह-जगह तोरण द्वार सजाए गए थे। राहगीरों और श्रद्धालुओं के लिए आरती, प्रसाद और गर्मी को देखते हुए ठंडे शरबत की विशेष व्यवस्था की गई थी।
  • मंत्रोच्चार के साथ प्रवेश: कथा स्थल पर पहुंचने पर कलश यात्रा की विशेष आरती उतारी गई। इसके बाद विद्वान ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलशों को कथा पंडाल में स्थापित करवाकर कथा का शुभारंभ किया गया।

​बेजुबान पक्षियों के लिए 501 परिंडों का वितरण

​भीषण गर्मी के मौसम को देखते हुए आयोजकों ने सामाजिक सरोकार भी निभाया। कर्म योग सेवा ट्रस्ट की ओर से बेजुबान पक्षियों को राहत देने के लिए कथा स्थल पर 501 परिंडे (मिट्टी के बर्तन) निःशुल्क वितरित किए गए, ताकि लोग इन्हें अपने घरों की छतों पर बांधकर पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था कर सकें।

​”बेटे भाग्य से, तो बेटियां सौभाग्य से मिलती हैं”: पंडित उमेश व्यास

​कथा के प्रथम सोपान में कथाव्यास पंडित उमेश व्यास ने मीराबाई के पूर्व जन्म के प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक और सुंदर वर्णन किया। प्रथम दिन ही पंडाल में मीराबाई का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

​व्यासजी ने समाज में बेटियों के महत्व पर विशेष जोर देते हुए कहा:

​”अगर हम समाज में इसी तरह अपनी बेटियों का जन्मोत्सव मनाते रहेंगे, तो हमारा कथा कहना और आपका कथा सुनना सार्थक हो जाएगा। बेटियां साक्षात मां दुर्गा का रूप होती हैं। मीराबाई भी एक साहसी और शूरवीर पिता की पुत्री थीं।”

 

​उन्होंने कन्यादान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यदि बेटी नहीं होगी तो कल को मां कौन बनेगी? भाई को बहन कहां से मिलेगी और घरों में बहू कहां से आएगी? उन्होंने मार्मिक शब्दों में कहा कि बेटे भाग्य से मिलते हैं, लेकिन बेटियां सौभाग्य से मिलती हैं। बेटी के रूप में घर में साक्षात लक्ष्मी का आगमन होता है। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है- ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यते रमंते तत्र देवता’ अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है।”

​मीराबाई: साहस और अटूट भक्ति की मिसाल

​पंडित उमेश व्यास ने कहा कि प्रेम दीवानी मीराबाई अपने गिरधर गोपाल से अनन्य प्रेम कर संसार को भक्ति और प्रेम का सच्चा अर्थ समझाने आई थीं। राजस्थान की धरा को गौरवान्वित करने वाली भक्तशिरोमणि मीराबाई के चरित्र का सुंदर चित्रण करते हुए उन्होंने कहा कि भक्ति मार्ग पर मीराबाई पूरी दुनिया के लिए एक आदर्श हैं। मीराबाई ने यह साबित कर दिया कि नारी कभी अबला नहीं होती, वे प्रेम की पराकाष्ठा और साहस की अद्भुत मिसाल थीं।

​महाआरती के साथ प्रथम दिन की कथा को विश्राम

​कथा के समापन पर महिला मंडल जागृति संगठन के द्वारा भव्य महाआरती उतारी गई। इसके बाद उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को छप्पन भोग व विशेष प्रसाद का वितरण किया गया और जयकारों के साथ प्रथम दिन की कथा को विश्राम दिया गया। कथा में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु और मातृशक्ति उपस्थित रही।

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