भरतपुर में सिलिकोसिस का कहर: दो गांवों में 70% लोग प्रभावित, तीन और मजदूरों की मौत
Written By: नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
मई 12, 2025
भरतपुर, राजस्थान:
भरतपुर जिले में जानलेवा बीमारी सिलिकोसिस ने एक बार फिर कहर बरपाया है। आरबीएम अस्पताल में इलाज के दौरान सिलिकोसिस से ग्रसित तीन मजदूरों की मौत हो गई। मृतकों में घनश्याम (गांव खेड़ा ठाकुर), रामलाल और नरेश सिंह (दोनों निभेरा गांव) शामिल हैं। ये सभी लंबे समय से इस लाइलाज बीमारी से पीड़ित थे।
70% आबादी बीमारी की चपेट में
भरतपुर के खेड़ा ठाकुर और निभेरा गांवों में सिलिकोसिस की स्थिति भयावह है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन गांवों की करीब 70 प्रतिशत आबादी इस बीमारी से ग्रसित है। यहां के अधिकतर लोग पहाड़ों पर मजदूरी कर पत्थर काटने का काम करते हैं। इसी दौरान सिलिका धूल उनके फेफड़ों में पहुंच जाती है और धीरे-धीरे उन्हें मौत की ओर ले जाती है।
क्या है सिलिकोसिस?
सिलिकोसिस एक लाइलाज फेफड़ों की बीमारी है, जो क्रिस्टलीय सिलिका धूल के लंबे समय तक संपर्क में रहने से होती है। यह धूल सांस के ज़रिए शरीर में प्रवेश कर फेफड़ों में जम जाती है, जिससे सूजन, फाइब्रोसिस (ऊतक का कठोर होना) और धीरे-धीरे सांस लेने में कठिनाई होने लगती है।
मुख्य लक्षण:
- लगातार खांसी
- सांस फूलना
- अत्यधिक थकावट
यह बीमारी मुख्यतः खनन, पत्थर प्रसंस्करण और निर्माण कार्यों से जुड़े मजदूरों में पाई जाती है।
प्रशासन की लापरवाही बनी मौत की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, सिलिकोसिस को सुरक्षा उपायों से रोका जा सकता है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और ठेकेदारों की लापरवाही से मजदूर बिना मास्क व सुरक्षा उपकरणों के काम करने को मजबूर हैं। पत्थर कटाई के दौरान उठने वाली धूल सीधा मजदूरों के फेफड़ों तक पहुंचती है, जिससे बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
सरकारी आंकड़े और मुआवजा व्यवस्था
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अविरल सिंह ने बताया कि वर्ष 2018 से इस बीमारी के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा शुरू की गई थी। 2022 से अब तक 4400 से अधिक मजदूरों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें से 225 को सिलिकोसिस पीड़ित घोषित किया जा चुका है। अब तक इस बीमारी से 650 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
सरकार द्वारा घोषित नीति के अनुसार:
- सिलिकोसिस पीड़ित को 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है
- मृत्यु के बाद परिजनों को 2 लाख रुपये और अंतिम संस्कार के लिए 10 हजार रुपये मिलते हैं
जरूरत है ठोस कदमों की
सिलिकोसिस की भयावहता और सरकार की राहत योजनाओं के बावजूद जमीनी स्तर पर जागरूकता और सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी बनी हुई है। यदि प्रशासन, ठेकेदार और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर गंभीरता नहीं दिखाई, तो आने वाले समय में यह स्थिति और विकराल हो सकती है।

