जयपुर, 17 जुलाई/ नरेश गुनानी/राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। योजना में किसी भी प्रकार की वित्तीय एवं प्रक्रियागत अनियमितता के प्रति सरकार ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। इसके तहत पिछले तीन महीनों में 51 संबद्ध अस्पतालों को योजना से निलंबित कर दिया गया है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने इस कार्रवाई पर स्पष्ट किया कि राजकोष के वित्त का दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और फर्जी क्लेम किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
एक माह में 24 अस्पतालों पर 3 करोड़ का जुर्माना
प्रमुख शासन सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) गायत्री राठौड़ के अनुसार, भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करते हुए चिकित्सा विभाग ने RGHS योजना को लगातार सुदृढ़ किया है। इसी कड़ी में पिछले एक महीने के दौरान ऑडिट के आधार पर 24 संबद्ध अस्पतालों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की गई है। इन अस्पतालों पर करीब 3 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है।
राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. निधि पटेल द्वारा प्रत्येक मामले में अस्पतालों की विस्तृत सुनवाई की गई। प्रस्तुत अभिलेखों, उपलब्ध साक्ष्यों एवं तथ्यों का गहन परीक्षण करने के बाद ही जुर्माने और रिकवरी का यह निर्णय लिया गया।
जांच में सामने आईं ये गंभीर अनियमितताएं
ऑडिट एवं जांच के दौरान अस्पतालों में कई गंभीर वित्तीय एवं प्रक्रियागत कमियां पाई गईं, जिनके कारण योजना पर अनावश्यक वित्तीय भार पड़ रहा था। मुख्य रूप से निम्नलिखित अनियमितताओं की पुष्टि हुई है:
- दस्तावेजों की डुप्लीकेसी: क्लेम हासिल करने के लिए कागजात की नकल या हेरफेर करना।
- अनावश्यक जांचें: मरीजों की जरूरत से अधिक जांचें करवाना।
- पैकेज स्प्लिटिंग: अधिक भुगतान प्राप्त करने के उद्देश्य से एक ही पैकेज में सम्मिलित सेवाओं एवं प्रक्रियाओं को अलग-अलग दर्शाकर क्लेम प्रस्तुत करना।
- दस्तावेजों का अभाव: क्लेम के समर्थन में आवश्यक मेडिकल दस्तावेजों का न होना।
- फर्जी आईपीडी क्लेम: ओपीडी (बाह्य रोगी) मरीजों को अनुचित रूप से आईपीडी (भर्ती मरीज) में परिवर्तित कर फर्जी क्लेम उठाना।
इन प्रमुख अस्पतालों पर गिरी गाज
रिकवरी और जुर्माने की इस कार्रवाई के दायरे में प्रदेश के कई बड़े और प्रतिष्ठित अस्पताल शामिल हैं। कुल 24 अस्पतालों पर यह कार्रवाई हुई है, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित नाम हैं:
- पारस जेके हॉस्पिटल (उदयपुर)
- जील हॉस्पिटल (डूंगरपुर)
- मार्बल सिटी हॉस्पिटल (अजमेर)
- मनीपाल हॉस्पिटल (जयपुर)
- सोनी हॉस्पिटल (जयपुर)
- इंडस Hospital (जयपुर)
ऑडिट प्रणाली को और मजबूत करेगी सरकार
राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने बताया कि योजना के संचालन में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राजकोष की एक-एक पाई केवल पात्र लाभार्थियों के हित में ही व्यय हो।
इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए विभाग की ऑडिट प्रणाली को और अधिक प्रभावी तथा आधुनिक बनाया जा रहा है। भविष्य में भी किसी भी प्रकार की फर्जी बिलिंग, अनियमित क्लेम, प्रक्रियागत उल्लंघन अथवा वित्तीय गड़बड़ी पाए जाने पर नियमानुसार कठोर कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।