भगवान श्रीहरि की ‘योगनिद्रा’ का वास्तविक निहितार्थ

सुनील शर्मा/विष्णु पुराण व वैदिक चिंतन के अनुसार, भगवान विष्णु का ‘शयन’ कोई भौतिक निद्रा नहीं है, बल्कि यह ‘योगनिद्रा’—यानी गहन चेतना और अंतर्मुखी शक्ति का प्रतीक है।

  • आंतरिक संतुलन का अवसर: जब बाहरी गतिविधियां और सांसारिक सक्रियता घटती है, तब मनुष्य को अपने भीतर छिपे असंतुलन, इच्छाओं के भार, भ्रम और आसक्ति को देखने का अवसर मिलता है।
  • श्रद्धा, तर्क और विज्ञान का समन्वय: वर्षा ऋतु के इन चार महीनों में पाचन शक्ति मंद पड़ती है और वातावरण में सूक्ष्मजीवों की वृद्धि होती है। ऐसे में एकादशी व्रत और सात्विक दिनचर्या मनुष्य के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिरता को बनाए रखती है।

​पूजन एवं प्रार्थना श्लोक

​देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु को योगनिद्रा में लीन कराते समय इस पावन श्लोक का पाठ किया जाता है:

“सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्।

विबुद्धे च विबुध्येत प्रसन्नो मे भवाव्यय।।”

 

​इसके साथ ही “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” महामंत्र का जप साधक के मन को एकाग्र और सात्विक ऊर्जा से परिपूर्ण करता है।

​पंढरपुर धाम: वारकरी परंपरा का गौरव

​आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर महाराष्ट्र के पंढरपुर स्थित श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर में शासकीय महापूजा का विशेष महत्व है। धाराशिव (उस्मानाबाद) जिले की कळंब तहसील के गौरगांव निवासी निष्ठावान वारकरी दंपति श्री बाबासाहेब माधव माने एवं श्रीमती प्रभावती बाबासाहेब माने को इस वर्ष शासकीय महापूजा का सौभाग्य प्राप्त होना पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है। उनकी आजीवन निष्काम भक्ति और वारकरी परंपरा के प्रति समर्पण को हमारा नमन व हार्दिक शुभकामनाएं!

​जयपुर स्थित श्री गोविंद देव जी मंदिर में विशेष प्रशासनिक व्यवस्थाएँ

​राजस्थान की राजधानी जयपुर के आराध्य श्री गोविंद देव जी मंदिर में देवशयनी एकादशी और आषाढ़ी पर्व पर उमड़ने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और मंदिर प्रबंध समिति द्वारा व्यापक एवं सुव्यवस्थित इंतज़ाम किए जाते हैं:

  • सुगम दर्शन एवं कतार प्रबंधन:
    • ​श्रद्धालुओं की भारी आवक को नियंत्रित करने के लिए मंदिर प्रांगण और जलेबी चौक क्षेत्र में ज़िग-ज़ैग (Zig-Zag) बैरिकेडिंग बनाई जाती है।
    • ​पुरुष, महिला, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग प्रवेश व निकास द्वार निर्धारित किए जाते हैं।
  • सुरक्षा व्यवस्था एवं निगरानी:
    • ​मंदिर परिसर व आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल और होमगार्ड के जवान तैनात रहते हैं।
    • ​पूरे मंदिर क्षेत्र की 24 घंटे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों और ड्रोन के माध्यम से निगरानी की जाती है। सादा वस्त्रों में भी पुलिसकर्मी मुस्तैद रहते हैं।
  • छाया, पेयजल व सुविधाएँ:
    • ​धूप व उमस से बचाव के लिए कतार वाले रास्तों पर जर्मन डोम, टेंट तथा छायादार कनातें लगाई जाती हैं।
    • ​श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह शीतल पेयजल (वॉटर कूलर व मटके) और पंखे/कूलर की व्यवस्था की जाती है।
  • चिकित्सा एवं आपातकालीन सेवाएँ:
    • ​मंदिर परिसर में 24×7 मेडिकल कैम्प और प्राथमिक उपचार किट के साथ डॉक्टरों की टीम तैनात रहती है।
    • ​किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ तैनात रखी जाती हैं।
  • यातायात एवं पार्किंग प्रबंधन:
    • ​परकोटा क्षेत्र (बड़ी चौपड़, हवा महल मार्ग, जलेबी चौक) में यातायात को सुचारू रखने के लिए विशेष ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया जाता है।
    • ​श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए चौगान स्टेडियम, रामनिवास बाग और आसपास के निर्धारित स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की जाती है।

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