भगवान भोलेनाथ का हुआ सहस्त्रघटाभिषेक, मनमोहक जल विहार झांकी के दर्शन कर निहाल हुए श्रद्धालु

जयपुर/योगेश शर्मा/ ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की द्वादशी शुक्रवार को गुलाबी नगरी में ‘राम-लक्ष्मण द्वादशी’ के रूप में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। इस पावन अवसर पर शहर के विभिन्न आराध्य देवों के मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन हुए। इसी कड़ी में त्रिपोलिया बाजार के तंवर जी का नोहरा स्थित श्री शिव शक्ति हनुमान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। यहाँ ‘श्री मन्न नारायण प्रंन्यास मंडल’ के तत्वावधान में भगवान भोलेनाथ का भव्य सहस्त्रघटाभिषेक (हजारों कलशों से अभिषेक) संपन्न हुआ।

​वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से हुआ पूजन

​धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत पंडित दिनेश शर्मा के आचार्यत्व में पांच विद्वान पंडितों द्वारा करवाई गई। पंडितों ने सबसे पहले कलश स्थापना की और गणेश-गौरी के मंडल बनाकर पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मुख्य पूजन संपन्न कराया। इसके बाद श्री मन्न नारायण प्रंन्यास मंडल के अध्यक्ष पंडित तरुण भारती ने मुख्य यजमान के रूप में पूजा-अर्चना कर सहस्त्र घटाभिषेक की मुख्य रस्म को पूरा किया।

​विविध औषधि द्रव्यों से महाअभिषेक

​सहस्त्रघटाभिषेक से पूर्व भगवान शिव का विशेष द्रव्यों से महाअभिषेक किया गया, जिसमें शामिल थे:

  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर)
  • विजया (भांग)
  • ईक्षु रस (गन्ने का रस)
  • विविध जड़ी-बूटियाँ एवं दिव्य औषधि द्रव्य

​फूलों से अनूठा श्रृंगार और दिव्य जल विहार झांकी

​महाअभिषेक के पश्चात कड़कड़ाती गर्मी से भगवान को शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से भोलेनाथ का सुगंधित पुष्पों से अत्यंत सुंदर और मनमोहक श्रृंगार किया गया। इसके बाद मंदिर परिसर में भगवान की ‘जल विहार की झांकी’ सजाई गई, जो भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रही।

शंखनाद और महाआरती:

झांकी के दर्शन खुलते ही पूरा मंदिर परिसर शंख, घंटा और घड़ियाल की सुमधुर ध्वनियों से गूंज उठा। इसके बाद ठाकुर जी की भव्य महाआरती उतारी गई और भक्तों में विशेष प्रसाद का वितरण किया गया।

 

​श्रद्धालुओं की रही गरिमामयी उपस्थिति

​इस भव्य धार्मिक उत्सव में शहर के कई प्रबुद्धजनों और आम भक्तों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से एडवोकेट कमलेश शर्मा, शीला शर्मा, नंदन भौमियां और शीतल शर्मा सहित बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने कतारबद्ध होकर भगवान शिव के इस अनूठे रूप के दर्शन किए और पुण्य लाभ कमाया।

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