भगवान गणेश हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं: रामबहादुर राय

भगवान गणेश हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं: रामबहादुर राय
आईजीएनसीए में ‘विघ्नेश्वर कुटुम्ब’ प्रदर्शनी का शुभारंभ, दुर्लभ मूर्तियों और पेंटिंग्स का संग  

28 अगस्त। गणेश शर्मा। टेलीग्राफ टाइम्स।

नई दिल्ली।गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में एक भव्य सांस्कृतिक आयोजन किया गया। इस अवसर पर लांस डेन के संग्रह से 12वीं से 20वीं शताब्दी तक की दुर्लभ गणेश मूर्तियों और प्रसिद्ध कलाकार के. विश्वनाथन की कलाकृतियों की प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया।

प्रदर्शनी का शीर्षक: ‘विघ्नेश्वर कुटुम्ब – गणेश और उनका परिवार’

Photo credit Telegraph Times

इस अनोखी प्रदर्शनी में भगवान गणेश को विभिन्न रूपों में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें उन्हें भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र तथा भगवान कार्तिकेय के भाई के रूप में दर्शाया गया है। यह प्रदर्शनी दर्शनम गैलरी में 5 सितंबर तक आम जनता के लिए खुली रहेगी।

प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में आईजीएनसीए के अध्यक्ष और पद्म भूषण से सम्मानित राम बहादुर राय, सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, संरक्षण एवं सांस्कृतिक अभिलेखागार प्रभाग के प्रमुख प्रो. अचल पंड्या और कला दर्शन प्रभाग की प्रमुख प्रो. ऋचा कांबोज मौजूद रहे।

अध्यक्ष का संबोधन

प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए राम बहादुर राय ने कहा:

“गणेश हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। वह ज्ञान और संस्कृति के पथप्रदर्शक हैं। ऐसे आयोजनों का वास्तविक उद्देश्य इन्हें अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना है, विशेषकर युवाओं को हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ना।”

आईजीएनसीए की पहल

प्रो. अचल पंड्या ने कहा कि हाल के वर्षों में आईजीएनसीए ने अपने संग्रह को आम जनता तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। उन्होंने बताया कि लांस डेन संग्रह से प्राप्त ये मूर्तियाँ न केवल कलात्मक दृष्टि से अनमोल हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं की गहराई को भी अभिव्यक्त करती हैं।

प्रदर्शनी की विशेषताएँ

  • 12वीं से 20वीं शताब्दी की गणेश मूर्तियाँ
  • लांस डेन, ब्रिटिश कला इतिहासकार और संग्रहकर्ता, का निजी संग्रह
  • के. विश्वनाथन की विशिष्ट पेंटिंग्स
  • गणेश जी को परिवार के साथ विविध रूपों में प्रस्तुत किया गया

कला प्रेमियों की भीड़

इस अवसर पर कला प्रेमियों, विद्वानों और आम दर्शकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। प्रदर्शनी ने सभी को भारतीय कला की विविधता और गणेश जी की बहुआयामी छवि से रूबरू कराया।

 

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