भक्ति में डूबी छोटी काशी: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सपत्नीक सुनी शिव महापुराण, पंडित मिश्रा बोले— महादेव को वैभव नहीं, केवल समर्पण चाहिए

| योगेश शर्मा

जयपुर। ‘जयपुर परिवार सेवा ट्रस्ट’ के तत्वावधान में मानसरोवर स्थित वीटी रोड मेला ग्राउंड पर आयोजित सात दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन रविवार को श्रद्धा का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सीहोर वाले विख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपनी ओजस्वी वाणी से संपूर्ण वातावरण को शिवमय कर दिया।

फ़ोटो टेलीग्राफ टाइम्स

मुख्यमंत्री ने लिया आशीर्वाद

​कथा के विशेष अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपनी धर्मपत्नी गीता शर्मा के साथ कथा श्रवण करने पहुँचे। मुख्यमंत्री दंपति ने व्यासपीठ का पूजन किया और पंडित प्रदीप मिश्रा से आशीर्वाद लिया। इस दौरान आयोजन समिति के मुख्य व्यवस्थापक अखिलेश अत्री और मनोज पांडे ने मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया।

वैभव नहीं, भाव के भूखे हैं भोलेनाथ

​श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पंडित मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सोने-चांदी या संसार के किसी वैभव की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा:

​”मेरे भोले बाबा को तो केवल भक्त का दिल और पूर्ण समर्पण चाहिए। धन से आप वीआईपी ट्रीटमेंट या सांसारिक वस्तुएं तो खरीद सकते हैं, लेकिन अपनी सांसें नहीं बढ़ा सकते और न ही परमात्मा को पा सकते हैं।”

 

​उन्होंने जोर देकर कहा कि शिव की भक्ति के लिए न तो उम्र की कोई सीमा है और न ही समय का कोई बंधन। जब भी चित्त लग जाए, तभी महादेव की आराधना शुरू कर देनी चाहिए क्योंकि मन का भाव ही सबसे बड़ा तीर्थ है।

शिवलिंग की महिमा और वैज्ञानिक पक्ष

​पंडित मिश्रा ने शिवलिंग की व्याख्या करते हुए उसे शिव और शक्ति (ऊर्जा) का प्रतीक बताया। उन्होंने भक्तों को सुझाव दिया कि:

  • छोटा स्वरूप: घर में अंगूठे के पोर के बराबर छोटा शिवलिंग रखना चाहिए, जिससे घर में सकारात्मकता रहती है और बड़े रोगों से मुक्ति मिलती है।
  • पाप नाश: शिव पर अर्पित जल को ग्रहण करने से कायिक, वाचिक और मानसिक, तीनों प्रकार के पापों का शमन होता है।
  • भाग्य विधाता: भोले बाबा केवल भाग्य बताते नहीं हैं, बल्कि वे भक्तों का बिगड़ा हुआ भाग्य स्वयं बनाते हैं।

चमत्कारी अनुभवों का वाचन

​कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने देश के विभिन्न कोनों (जयपुर, भुसावर आदि) से आए भक्तों के पत्रों का वाचन किया। इन पत्रों में श्रद्धालुओं ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए कि कैसे ‘एक लोटा जल’ और नियमित शिव भक्ति से उन्हें सरकारी नौकरी मिली, गंभीर बीमारियों से छुटकारा मिला और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त हुई।

भजनों पर झूमे श्रद्धालु

​कथा के बीच जब पंडित मिश्रा ने “ओ शंभू तेरे बिना क्या जीना…” और “वचन दिया तो निभाना पड़ेगा…” जैसे भजन गाए, तो पंडाल में मौजूद लाखों श्रद्धालु झूम उठे। पूरा मेला ग्राउंड ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गुंजायमान हो गया।

आरती के साथ विश्राम

​दिनभर की कथा का समापन महाआरती के साथ हुआ, जिसमें आयोजन समिति के पदाधिकारियों सहित मुख्य यजमानों ने भाग लिया। मुख्य व्यवस्थापक अखिलेश अत्री ने बताया कि यह कथा 26 मार्च तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक निरंतर जारी रहेगी।

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