भक्ति, आस्था और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है अखण्ड दीप:- बाबा-भागलपुर
| लोकेंद्र सिंह शेखावत
भागलपुर, बिहार! भारत में कई प्राचीन मंदिरों और साधना केंद्रों में वर्षों से अखंड दीप प्रज्वलित हैं, जो अटूट आस्था, निरंतर भक्ति और दिव्य ऊर्जा के प्रतीक हैं।
इस सम्बन्ध में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त ज्योतिष योग शोध केन्द्र, बिहार के संस्थापक दैवज्ञ पं. आर. के. चौधरी उर्फ बाबा-भागलपुर, भविष्यवेत्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ ने सुगमतापूर्वक बतलाया कि:- समस्त संसार में निराशा रूपी अंधकार को दूर करने के लिए अखण्ड दीप विशेष रूप से प्रासंगिक है। अखण्ड दीप ज्ञान और आत्म-प्रकाश का प्रतीक है, जो अंधकार (अज्ञान) को दूर करता है। इसे अटूट भक्ति और ईश्वर के निरंतर आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।
अखंड दीप का उद्देश्य है सम्पूर्ण संसार में प्रकाश को संचारित करना। इसी उद्देश्य से हमारे साधना स्थल पर 15 जनवरी 2003 ई.से माँ उग्रकालिका की प्रतिमा के समीप अखंड दीप अनवरत जल रहा है। कई हिन्दी समाचार-पत्रों के पत्रकार व संवाददाताओं के टीम ने बाबा-भागलपुर के साधना स्थल पर पहुंच कर विस्तार से इस अखण्ड दीप और बाबा-भागलपुर के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारियाँ प्राप्त की।
प्राप्त विस्तृत जानकारी के आलोक में ज्योतिष के रास्ते चलते हुए स्वमेव ही बाबा-भागलपुर तंत्र विद्या की ओर उन्मुख हो गये। गहराई तक उतरते हुए उन्होंने साधना के दौरान अपने साधना स्थल पर अपनी कुलदेवी माँ काली के उग्रस्वरूप माँ उग्रकालिका को स्थापित कर दिया। आमजनों के जीवन में व्याप्त निराशा रूपी अंधकार को दूर कर आशा रूपी प्रकाश का संचार करना बाबा-भागलपुर का उद्देश्य है। समस्त जग को प्रकाश संचारित करने की कामना के साथ अखंड दीप जलाया। आये दिन अपने कष्ट निवारण के लिए पहुँचे लोगों को यथासंभव संतुष्ट कर विदा करते हैं।
बिहार राज्य के सहरसा जिले के बनगाँव ग्राम के मूल निवासी बाबा-भागलपुर वर्तमान में आदमपुर के न्यू बैंक कॉलोनी में रहते हैं। अपनी युवावस्था के प्रारंभिक काल से ही पढाई और नौकरी के सिलसिले में पंडितजी घर से बाहर ही रहे। सेवा देने के क्रम में उनको वाराणसी जाने का अवसर मिला। अपने वाराणसी प्रवास के दौरान ही एक दिन जब वह दशमेश घाट पर भ्रमण कर रहे थे तो संयोगवश एक अघोरी तांत्रिक से मुलाकात हो गई। वाकया वर्ष 1996-1997 के आसपास का था। तांत्रिक से मिलने के बाद बाबा-भागलपुर ने काली रहस्य सहित अन्य तांत्रिक पुस्तकें खरीदकर गहन अध्ययन किया। इस दौरान नौकरी के क्रम में उन्हें भागलपुर, साहिबगंज तथा पटना जैसे शहरों में भी रहना पड़ा।
बाबा ने भागलपुर में ही स्थायी रूप से रहने का निश्चय किया। आखिरकार, वर्ष 2003 ई.से भागलपुर में स्थायी रूप से रहने लगे। माँ उग्रकालिका की तस्वीर को स्थापित कर देवी की साधना में पूर्ण रूप से रत हो गये। जग कल्याण के लिए अखंड दीप जलाया। वर्ष 2003 से 2008 ई. तक उनका साधना क्रम अनवरत चलता रहा। उनकी कुलदेवी माता काली के अतिरिक्त बाबा की इष्ट माँ कामाख्या और आराध्य माँ बगलामुखी हैं, जिनकी आराधना के लिए शिव के मृत्युंजय रूप की साधना करनी पड़ती है। संसार को खराब ग्रह दशा से तारने के लिए हर वर्ष नवरात्र के दौरान बाबा-भागलपुर मौन व्रत धारण करते हैं। वर्ष 2020 के भीषण कोरोना काल में उन्होंने तीन माह तक अनवरत मौन व्रत धारण किया था। उसके बाद 07 अगस्त 2023 से अभी तक अनवरत मौनव्रत साधना में हैं।
साथ ही सांसारिक, राजनीतिक व धार्मिक-आध्यात्मिक गतिविधियों पर भी बाबा-भागलपुर की आलेख और भविष्यवाणी समय-समय पर प्रकाशित होती रहती हैं। पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का पत्ता साफ हो जाएगा की भविष्यवाणी की थी। उनका पहला लेख परम न्यायाधीश शनिदेव, स्थानीय दैनिक नई बात में प्रकाशित हुई थी। बाबा-भागलपुर की प्रथम भविष्यवाणी 2003 ई. में प्रकाशित हुई थी जिसका शीर्षक:- मायावती सरकार गिर जाएगी और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री होंगे। ये वह व्यक्ति हैं जिसने 16 जून, 2016 को भविष्यवाणी की थी कि हरीश रावत फ्लोर टेस्ट पास करेंगे तथा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। गुजरात के मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल की जगह नया चेहरा गुजरात के मुख्यमंत्री के पद पर विराजमान होंगे। टी -20 क्रिकेट मैच, सनराइजर्स, हैदराबाद फाइनल मैच, 15 अगस्त 2016 को, बाबा-भागलपुर ने बिहार प्रदेश के राजनीति में उथल-पुथल की भविष्यवाणी (महागठबंधन सरकार) फेसबुक पोस्ट में की थी। इतना ही नहीं 09 मार्च 2019 (शनिवार) को प्रकाशित भविष्यवाणी जिसका शीर्षक:- ग्रहों के खेल में ट्रम्प को दिख सकते हैं दिन में ही तारे!
उपांकित सभी भविष्यवाणी शत-प्रतिशत सही साबित हुई। 2003 ई. से अब तक अनेकानेक (एक-दो को छोड़कर) भविष्यवाणी सही साबित हुई है और हो रही है।