रिपोर्ट योगेश शर्मा
जयपुर। सिटी पैलेस, जयपुर में 16 अप्रैल की शाम एक विशेष गरिमा और सम्मान के साथ जयपुर के हिज हाइनेस ब्रिगेडियर महाराजा सवाई भवानी सिंह, एमवीसी की स्मृति को समर्पित रही। उनकी 15वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित एक पैनल चर्चा में राजस्थान के प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों ने उनके बहुआयामी जीवन, सैन्य पराक्रम और सांस्कृतिक योगदान पर विस्तृत प्रकाश डाला।

वीरता और विरासत के संरक्षक को नमन
एक उत्कृष्ट सैनिक, कुशल राजनेता और जयपुर की सांस्कृतिक विरासत के सजग प्रहरी के रूप में पहचाने जाने वाले महाराजा सवाई भवानी सिंह का जीवन राष्ट्र सेवा और जयपुर की अस्मिता के प्रति समर्पित था। 1971 के भारत-पाक युद्ध में अदम्य वीरता के लिए उन्हें ‘महावीर चक्र’ से नवाजा गया था। भारतीय सेना की नवगठित ‘पैरा कमांडो यूनिट’ से लेकर ’10वीं पैराशूट रेजिमेंट’ के नेतृत्व तक, उनका सैन्य करियर साहस की मिसाल रहा।
सेना से निवृत्ति के बाद उन्होंने जयपुर की सांस्कृतिक पहचान को विश्व पटल पर मजबूती दी। 1983 में जयगढ़ किले को आम जनता के लिए खोलना और सिटी पैलेस संग्रहालय के संस्थागत ढांचे को सुदृढ़ करना उनके दूरदर्शी निर्णयों में शामिल था।
पैनल चर्चा: विविध पहलुओं पर मंथन
कार्यक्रम का शुभारंभ लेफ्टिनेंट जनरल ठाकुर दौलत सिंह शेखावत और प्रोफेसर आर. एस. खंगारोत के परिचयात्मक संबोधन से हुआ। इसके पश्चात आयोजित मुख्य पैनल चर्चा में उनके व्यक्तिगत संस्मरणों और सैन्य व सांस्कृतिक भूमिकाओं पर गहन चर्चा हुई।
पैनल में शामिल प्रमुख वक्ता:
- मेजर जनरल दलवीर सिंह, एवीएसएम, वीआरसी, वीएसएम
- कर्नल वी. एस. चंद्रावत, एसएम, सीपीपी
- कर्नल हेम सिंह शेखावत, सेना मेडल
- ठाकुर दुर्गा सिंह, मंडावा
विशेषज्ञों ने बदलते दौर में उनके नेतृत्व और विरासत संरक्षण के प्रति उनके आधुनिक दृष्टिकोण की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। चर्चा का कुशल संचालन सिटी पैलेस संग्रहालय के मानद सलाहकार डॉ. जाइल्स टिलोटसन ने किया।
महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह का भावुक संबोधन
इस अवसर पर हिज हाइनेस महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह ने अपने नाना जी को याद करते हुए कहा:
”मेरे नाना जी ने हमेशा देश और जयपुर को सर्वोपरि रखा। उनके समर्पण को बचपन से देखना मेरे लिए सौभाग्य की बात रही। आज की पैनल चर्चा उनके विश्वास को आगे बढ़ाने का प्रयास है कि विरासत स्थल केवल अतीत की वस्तु नहीं, बल्कि संवाद और जुड़ाव के ‘जीवित केंद्र’ होने चाहिए। उन्हें याद करने का इससे बेहतर तरीका कोई और नहीं हो सकता था।”
‘जीवित विरासत’ की ओर बढ़ते कदम
यह आयोजन सिटी पैलेस संग्रहालय के उन निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जिसके तहत इतिहास को केवल किताबों तक सीमित न रखकर साझा समीक्षा और संवाद के माध्यम से एक ‘जीवित विरासत स्थल’ (Living Heritage Site) के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। कार्यक्रम में आए अतिथियों ने इसे सीखने और सहभागिता का एक उत्कृष्ट मंच बताया।